लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पैचवर्क से नहीं होगा समाधान
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति
लखनऊ: 4200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की प्रतिष्ठा को खतरे में डाल दिया है। जहां भी मरम्मत की गई, वहां भी सड़क की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। इस पर निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इंजीनियरों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि इस एक्सप्रेसवे का डिजाइन बेहद खराब है, जिससे अब केवल सड़क की रिसर्फेसिंग ही एकमात्र विकल्प बचा है। हालांकि, विशेषज्ञ समिति की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
डिजाइन में खामियां
भाजपा सांसद नवीन जैन के परिवार की कंपनी पीएनसी इन्फ्राटेक ने इस एक्सप्रेसवे का निर्माण किया, जिसका उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ। जुलाई के अंत से ही सड़क में गड्ढों और धंसने की समस्याएं सामने आने लगीं।
जब समस्याएं बढ़ने लगीं, तो एनएचएआई ने 5 अगस्त को कार्रवाई की। कंपनी को नान परफोर्मर घोषित करने के नोटिस जारी किए गए और टोल संग्रह पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा, आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया। समिति ने जांच जारी रखी और वाहनों के आवागमन को सुचारू रखने के लिए मरम्मत कार्य भी किया गया।
री-सरफेसिंग की आवश्यकता
मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का मामला गंभीर है, जिससे हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सड़क निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की गहनता से जांच की गई है और उसमें कोई खामी नहीं पाई गई है।
लेकिन, इस एक्सप्रेसवे का डिजाइन इतना खराब है कि पानी रिसकर अंदर चला गया और सड़क धंसने लगी। पैचवर्क से स्थिति में सुधार नहीं होगा, इस पर अधिकारी ने स्पष्ट किया।
अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा
इंजीनियरों की रिपोर्ट के अनुसार, सड़क की रिसर्फेसिंग करनी होगी, यानी सड़क को उखाड़कर नए जल निकासी डिजाइन के साथ नई परत चढ़ानी होगी। हालांकि, अंतिम निर्णय विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद ही लिया जाएगा।
अधिकारी ने उम्मीद जताई कि रिपोर्ट जल्द ही उपलब्ध होगी। उल्लेखनीय है कि डिजाइन में कमी का मतलब है कि डीपीआर में गड़बड़ी थी, जिस पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चिंता जताई है।
पैचवर्क की स्थिति
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर अब तक 148 स्थानों पर पैचवर्क किया जा चुका है। इनमें से 56 स्थानों पर सड़क अधिक धंसी हुई है, जहां पीएनसी ने 200 मीटर से लेकर डेढ़ किमी तक के लंबे पैच लगाए हैं। पीएनसी प्रबंधक वीएस कुंडू ने बताया कि बारिश के कारण समस्याएं आ रही हैं।
हालांकि, वरिष्ठ अधिकारी ने फिर से कहा कि पैचवर्क से स्थिति में सुधार नहीं होगा और रिसर्फेसिंग की आवश्यकता है।