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हरियाणा में रियल एस्टेट के लिए नई आवास नीति में बदलाव

हरियाणा सरकार ने किफायती आवास नीति 2013 में संशोधन करते हुए घरों की कीमतों में 12% तक की वृद्धि को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो सस्ते घरों की तलाश में हैं। नई दरें गुरुग्राम और फरीदाबाद में लागू होंगी, जिससे मध्यम वर्ग पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा। जानें इस नीति के अन्य शहरों पर प्रभाव और पेंडिंग प्रोजेक्ट्स के लिए क्या होगा।
 

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण निर्णय

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अगुवाई में आयोजित एक महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में हरियाणा के रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक बड़ा निर्णय लिया गया है। सरकार ने किफायती आवास नीति 2013 में संशोधन करते हुए घरों की कीमतों में 12 प्रतिशत तक की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। यह बदलाव हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम 1975 की धारा 9A के तहत किया गया है, जिसका सीधा प्रभाव उन हजारों लोगों पर पड़ेगा जो सस्ते आवास की उम्मीद कर रहे थे। डेवलपर्स और उद्योग संगठनों की मांग पर सरकार ने निर्माण लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए यह कदम उठाया है।


गुरुग्राम और फरीदाबाद में नई दरें लागू

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग (AGH) प्रोजेक्ट्स के तहत विभिन्न शहरों के लिए दरें निर्धारित की गई हैं। साइबर सिटी गुरुग्राम में उपभोक्ताओं को अब 5,575 रुपये प्रति वर्ग फीट का भुगतान करना होगा। इसके अलावा, बाल्कनी के लिए 1,300 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर तय की गई है, जिसकी अधिकतम सीमा 1.30 लाख रुपये रखी गई है। फरीदाबाद और सोहना जैसे शहरों में यह दर 5,450 रुपये प्रति वर्ग फीट होगी, जिससे मध्यम वर्ग के बजट पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।


मीडियम और लो-पोटेंशियल शहरों पर प्रभाव

सरकार ने प्रदेश के अन्य शहरों को उनकी विकास क्षमता के आधार पर श्रेणियों में विभाजित किया है। हाई और मीडियम पोटेंशियल शहरों में अब अफोर्डेबल फ्लैट्स के लिए 5,050 रुपये प्रति वर्ग फीट की दर से भुगतान करना होगा। वहीं, लो-पोटेंशियल शहरों के लिए यह दर 4,250 रुपये प्रति वर्ग फीट निर्धारित की गई है। बाल्कनी की दरें सभी शहरों के लिए समान रखी गई हैं। इस निर्णय से उन प्रोजेक्ट्स की लागत बढ़ जाएगी जहाँ निर्माण कार्य अभी शुरू होना है या आवंटन प्रक्रिया लंबित है।


पेंडिंग प्रोजेक्ट्स और ड्रा पर सरकार का स्पष्टीकरण

नई नीति का प्रभाव पुराने आवेदकों पर भी पड़ सकता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये संशोधित दरें उन सभी लाइसेंसों पर लागू होंगी जहाँ फ्लैट अभी तक आवंटित नहीं हुए हैं। जिन मामलों में पहले से आवेदन मांगे गए हैं, वहाँ सफल आवेदकों को पुराने और नए दरों के बीच का अंतर चुकाना होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि ड्रा की प्रक्रिया पुराने आवेदनों के आधार पर ही पूरी की जाएगी, लेकिन कब्जा पाने के लिए अधिक राशि का भुगतान करना होगा।