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17 वर्षीय छात्र ने गणित की पहेली को सुलझाकर जीता पुरस्कार

पेंसिलवेनिया के 17 वर्षीय छात्र कॉनर हिल ने गणित की एक कठिन समस्या को सुलझाकर 2.5 लाख डॉलर का पुरस्कार जीता है। उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से दुर्लभ त्रि-आयामी आकृतियों की संभावनाओं का अध्ययन किया, जिससे उन्हें अमेरिका की प्रमुख छात्र विज्ञान प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान प्राप्त हुआ। कॉनर की यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि युवा प्रतिभाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। जानें उनके शोध और भविष्य की योजनाओं के बारे में।
 

गणित की चुनौती का सामना


जब अधिकांश युवा पढ़ाई और स्कूल की गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, तब अमेरिका के पेंसिलवेनिया के कॉनर हिल ने गणित की एक जटिल समस्या को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। 17 वर्षीय कॉनर ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम विकसित किया, जिससे उन्होंने दुर्लभ त्रि-आयामी आकृतियों की संभावनाओं का अध्ययन किया। उनके इस प्रयास ने न केवल गणित की एक पुरानी पहेली को हल करने में मदद की, बल्कि उन्हें अमेरिका की एक प्रमुख छात्र विज्ञान प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान भी दिलाया। अब उनकी यह उपलब्धि युवा प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।


कंप्यूटर की मदद से गणित की गुत्थी सुलझाई

कॉनर हिल पोर्ट मटिल्डा में रहते हैं और डेल्टा हाई स्कूल के छात्र हैं। उन्होंने 'नोबल पॉलीहेड्रा' नामक विशेष त्रि-आयामी आकृतियों पर शोध किया। इन आकृतियों के सभी फलक समान होते हैं और हर कोने की संरचना भी एक जैसी होती है, जैसे कि क्यूब। कॉनर ने कंप्यूटर प्रोग्राम के माध्यम से इन आकृतियों की संभावित संरचनाओं का व्यवस्थित अध्ययन किया।


146 आकृतियों की खोज

गणितज्ञ पहले ही नोबल पॉलीहेड्रा के दो अनंत परिवार और 61 अलग-अलग उदाहरणों की पहचान कर चुके थे। सवाल यह था कि क्या इनके अलावा और आकृतियाँ मौजूद हैं। कॉनर के विकसित किए गए प्रोग्राम ने संभावनाओं की जांच की और उनके शोध के अनुसार अलग-अलग नोबल पॉलीहेड्रा की संख्या 146 है। इसके साथ ही पहले से ज्ञात दो अनंत परिवार भी मौजूद हैं।


2.5 लाख डॉलर का पुरस्कार

कॉनर की इस उपलब्धि ने उन्हें 2026 रीजेनरॉन साइंस टैलेंट सर्च में शीर्ष स्थान दिलाया। इस प्रतियोगिता में 2600 से अधिक आवेदन आए थे, जिनमें से 40 छात्रों को अंतिम दौर के लिए चुना गया। कॉनर ने सभी प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए पहला पुरस्कार जीता, जिसके साथ उन्हें 2.5 लाख डॉलर (लगभग 2.39 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिली।


MIT में आगे की पढ़ाई

कॉनर को यह समस्या एक ऑनलाइन ज्यामिति समुदाय के माध्यम से मिली थी। उन्होंने आगे शोध करते हुए इसमें डिस्क्रीट ज्योमेट्री और अल्जेब्रिक ज्योमेट्री के सिद्धांतों का उपयोग किया। अब वह MIT में दाखिला लेने की योजना बना रहे हैं। पढ़ाई के अलावा, कॉनर स्कूल के समाचार कार्यक्रम में काम करते हैं, पर्यावरण केंद्र में स्वयंसेवा करते हैं और जुगलिंग का भी शौक रखते हैं।