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अयोध्या में बंदर से पैसे वापस पाने की अनोखी पुलिस कार्रवाई

अयोध्या के सिविल लाइंस इलाके में एक महिला के पैसे बंदर द्वारा चुराने की अनोखी घटना सामने आई है। पुलिस ने बिना बल प्रयोग के एक चतुराई भरे तरीके से पैसे वापस दिलाए। जानिए कैसे पुलिस ने इस चुनौती का सामना किया और महिला को उसके पैसे लौटाए। यह घटना न केवल मजेदार है, बल्कि पुलिस की सूझबूझ को भी दर्शाती है।
 

अयोध्या में हुई अनोखी घटना


अयोध्या के सिविल लाइंस क्षेत्र में एक अजीब घटना ने सभी का ध्यान खींचा है। कोतवाली नगर थाना क्षेत्र में अंजू देवी उस समय चौंक गईं जब एक बंदर ने उनके 42,105 रुपये छीन लिए। महिला ने पैसे वापस पाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन बंदर ने उन्हें मजबूती से पकड़ रखा था। इस स्थिति ने उनके लिए अपने पैसे वापस पाना बेहद कठिन बना दिया।


पुलिस को मिली चुनौती

इस घटना की जानकारी स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी। यह मामला सामान्य चोरी से अलग था, क्योंकि पैसे किसी इंसान के पास नहीं, बल्कि बंदर के पास थे। पुलिस के सामने यह चुनौती थी कि बिना बंदर को डराए या बल प्रयोग किए पैसे कैसे वापस लाए जाएं।


पुलिस ने अपनाया अनोखा तरीका

सूचना मिलने के बाद सब-इंस्पेक्टर अशोक कुमार, पंकज सिंह, हेड कांस्टेबल कुलदीप यादव और कांस्टेबल अंकित मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को समझते हुए बंदर को पकड़ने या उससे पैसे छीनने का प्रयास नहीं किया। उन्हें पता था कि ऐसा करने पर बंदर भाग सकता है या पैसे फेंक सकता है। इसके बाद, पुलिस ने बंदर का ध्यान भटकाने के लिए केले का इस्तेमाल किया। जैसे ही बंदर केले में व्यस्त हुआ, पुलिसकर्मियों ने सावधानी से उसके पास से पैसे निकाल लिए। इस तरह बिना किसी नुकसान या अफरातफरी के पूरी रकम बरामद कर ली गई।


महिला को मिले पूरे पैसे

बंदर के पास से पैसे बरामद करने के बाद पुलिस ने उनकी जांच की और 42,105 रुपये की पूरी राशि की पुष्टि की। इसके बाद, पैसे अंजू देवी को वापस सौंप दिए गए। अपनी रकम वापस मिलने पर महिला ने पुलिसकर्मियों का धन्यवाद किया। मौके पर मौजूद लोगों ने भी पुलिस की सूझबूझ की सराहना की। आमतौर पर बंदर को भगाने या पकड़ने की कोशिश में स्थिति बिगड़ सकती थी, लेकिन पुलिस ने शांत रहकर एक ऐसा तरीका अपनाया जिससे न तो बंदर को नुकसान पहुंचा और न ही महिला की रकम गई। अयोध्या की यह घटना इसलिए भी खास बन गई है क्योंकि पुलिस ने समस्या का समाधान बल प्रयोग से नहीं, बल्कि समझदारी से निकाला।