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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से खुला 10 करोड़ साल पुराना ऑक्टोपस का रहस्य

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वैज्ञानिकों ने 10 करोड़ साल पहले के एक विशाल ऑक्टोपस के जीवाश्म खोज निकाले हैं। यह खोज समुद्री जीवों के इतिहास को नया मोड़ देती है और प्राचीन समुद्रों में इन शिकारी जीवों की भूमिका को उजागर करती है। शोध ने यह साबित किया है कि ये ऑक्टोपस उस समय के बड़े समुद्री डायनासोर को भी चुनौती देते थे। जानें इस खोज के पीछे की कहानी और इसके वैज्ञानिक महत्व के बारे में।
 

प्राचीन समुद्री शिकारी का रहस्य


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से 10 करोड़ साल पहले के एक रहस्यमय समुद्री जीव का राज़ सामने आया है। डायनासोर के युग में, समुद्र में 20 मीटर लंबे ऑक्टोपस का वर्चस्व था, जिसे समुद्र का राजा माना जाता था। इसकी खतरनाक प्रवृत्तियों के कारण इसे टॉप प्रीडेटर्स में गिना जाता था। होक्काइडो यूनिवर्सिटी द्वारा की गई इस नई रिसर्च ने समुद्री जीवों के इतिहास को लेकर वैज्ञानिकों को चौंका दिया है।


AI की मदद से प्राचीन जीवों की खोज

ऑक्टोपस के शरीर में हड्डियों या कठोर खोलों की कमी के कारण उनके जीवाश्म मिलना कठिन होता है। जापान की होक्काइडो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्राइंडिंग टोमोग्राफी जैसी तकनीकों का उपयोग करके प्राचीन ऑक्टोपस के दुर्लभ जीवाश्म खोज निकाले। यह शोध 23 अप्रैल 2026 को एक प्रमुख विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हुआ था।


समुद्री डायनासोर से भी बड़े शिकारी

शोध दल के प्रमुख प्रोफेसर यासुहिरो इबा के अनुसार, ये ऑक्टोपस सिराटा प्रजाति के थे, जो लेट क्रेटेशियस काल (लगभग 10 करोड़ साल पहले) में मौजूद थे। ये विशालकाय शिकारी थे, जो उस समय के बड़े समुद्री डायनासोर को भी चुनौती देते थे।


आक्रामक शिकारी की पहचान

वैज्ञानिकों ने इन जीवाश्मों का अध्ययन किया और पाया कि उनके जबड़ों पर खरोंच, दरारें और घिसाव के निशान थे। कुछ नमूनों में तो जबड़े का 10% हिस्सा घिस चुका था, जो यह दर्शाता है कि ये 20 मीटर लंबे जीव बेहद आक्रामक थे और अपने मजबूत जबड़ों से कठोर शिकार को आसानी से कुचल सकते थे।


विज्ञान की पुरानी धारणाओं में बदलाव

इस खोज ने विज्ञान की पुरानी धारणाओं को चुनौती दी है, जिसमें माना जाता था कि प्राचीन समुद्रों में केवल रीढ़ वाले जीवों का ही वर्चस्व था। यह रिसर्च यह स्पष्ट करती है कि बिना रीढ़ वाले ये ऑक्टोपस भी खाद्य श्रृंखला में शीर्ष पर थे। जीवाश्म के जबड़े के अधिक उपयोग से यह संकेत मिलता है कि 10 करोड़ साल पहले भी इन दैत्याकार जीवों का मस्तिष्क काफी विकसित था।