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इंडोनेशिया की रहस्यमयी फिरोजी झील: जहां नीली आग जलती है

इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में स्थित कावाह इजेन झील, जो दुनिया की सबसे अम्लीय झील मानी जाती है, अपने अद्भुत नीले आग के दृश्य के लिए प्रसिद्ध है। यह झील यूनेस्को द्वारा प्राकृतिक धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहां की ज्वालामुखीय संरचनाएं और भूवैज्ञानिक विशेषताएं इसे एक रहस्यमयी स्थान बनाती हैं। जानें इस झील की अम्लीयता के कारण और यहां के अद्भुत दृश्यों के बारे में।
 

प्रकृति का अद्भुत रहस्य

नई दिल्ली - प्रकृति की सुंदरता के साथ-साथ उसके रहस्यमय पहलुओं ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है। ऐसे ही एक स्थान का जिक्र करते हैं, जो इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में स्थित है। इसे यूनेस्को ने पृथ्वी की प्राकृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दी है। यह क्षेत्र ज्वालामुखीय परिदृश्य, अद्वितीय भूवैज्ञानिक संरचनाओं और सांस्कृतिक धरोहर से भरा हुआ है। यहां का सबसे प्रमुख आकर्षण माउंट इजेन है, जो एक स्ट्रैटोवोलकानो है, जिसमें कावाह इजेन नामक खूबसूरत फिरोजी क्रेटर झील है। यूनेस्को के अनुसार, यह झील दुनिया की सबसे अम्लीय झील मानी जाती है।


इजेन जियोपार्क की विशेषताएं

इजेन जियोपार्क में ज्वालामुखी शंकुओं, क्रेटर्स और लावा प्रवाहों की उच्च सांद्रता पाई जाती है। लाखों वर्षों की जटिल भूवैज्ञानिक प्रक्रियाओं ने इस क्षेत्र को आकार दिया है। इजेन काल्डेरा प्रणाली में लगभग 22 ज्वालामुखी शंकु मौजूद हैं। यह क्षेत्र 2016 में यूनेस्को द्वारा नामित बेलंबंगन बायोस्फीयर रिजर्व से भी जुड़ा हुआ है। कावाह इजेन क्रेटर झील का दृश्य अत्यंत आकर्षक है, जिसका पानी फिरोजी रंग का है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने 22 अगस्त 2013 को लैंडसैट 8 सैटेलाइट द्वारा इस झील का चित्र लिया था। झील का पीएच स्तर 0.3 से भी कम है, जबकि नींबू के रस का पीएच 2 होता है। इस उच्च अम्लता के कारण इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे अम्लीय क्रेटर झील कहा जाता है।


अम्लीयता का कारण

इस झील की अम्लीयता मुख्यतः मैग्मा से निकलने वाले वाष्पशील पदार्थों, चट्टानों के साथ रासायनिक प्रतिक्रियाओं, वाष्पीकरण और भूमिगत गर्म पानी की प्रणालियों से उत्पन्न होती है। झील से निकलने वाली बन्युपाहित नदी भी अम्लीय होती है, जिसका पीएच 2.5 से 3.5 के बीच रहता है, जो आसपास के इकोसिस्टम को प्रभावित करती है।


नीली आग का रहस्य

इजेन का सबसे रहस्यमयी आकर्षण नीली आग (ब्लू फायर) का दृश्य है। क्रेटर की दरारों से निकलने वाली सल्फ्यूरिक गैसें 360 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान पर जलती हैं, जिससे नीली लपटें बनती हैं। आम ज्वालामुखियों में लाल या नारंगी आग दिखाई देती है, लेकिन इजेन में उच्च सल्फर सांद्रता के कारण नीली आग उत्पन्न होती है। यह दृश्य केवल रात में ही स्पष्ट होता है, क्योंकि सूरज की रोशनी में यह छिप जाता है। इजेन ज्वालामुखी सक्रिय है और यहां सल्फर का खनन भी किया जाता है। मजदूर क्रेटर में पाइप लगाकर गैस को ठंडा कर सल्फर निकालते हैं, लेकिन जहरीली गैसों के कारण यह कार्य खतरनाक होता है।