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ग्रेटर नोएडा में सामुदायिक कुत्तों को पकड़ने का विवादास्पद वीडियो वायरल

ग्रेटर नोएडा में सामुदायिक कुत्तों को पकड़ने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें कुत्तों के रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। इस घटना ने पशु प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के बीच तीखी बहस को जन्म दिया है। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ लोग इसे कानूनी प्रक्रिया मानते हैं। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और लोगों की प्रतिक्रियाएं।
 

ग्रेटर नोएडा में सामुदायिक कुत्तों की पकड़


ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा में सामुदायिक कुत्तों को पकड़ने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। इस वीडियो में कुत्तों की रोने और छटपटाने की आवाजें सुनाई दे रही हैं, जिससे पशु प्रेमियों और स्थानीय निवासियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। यह कार्रवाई एक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) की शिकायत के बाद की गई, जिसमें कुछ कुत्तों को आक्रामक बताया गया था।


पशु कल्याण के मुद्दे

वीडियो के सामने आने के बाद, पशु कल्याण से जुड़े लोगों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी कुत्ते को आक्रामक घोषित करने से पहले उसके व्यवहार का सही मूल्यांकन होना चाहिए। केवल शिकायत के आधार पर किसी जानवर को आक्रामक मान लेना उचित नहीं है। पशु प्रेमियों ने यह भी पूछा कि इन कुत्तों को कहां ले जाया गया और क्या उनके साथ मानवीय तरीके से व्यवहार किया गया।


Dogs picked up for sterilisation deserve dignity, compassion, and humane handling.

We respectfully urge the authorities to ensure that all dog-catching staff are properly trained in animal welfare and humane capture techniques. These voiceless souls should never be subjected to… pic.twitter.com/sUOmsK3Y5A

— Vidit Sharma 🇮🇳 (@TheViditsharma) June 12, 2026



सोशल मीडिया पर आरोप

पोस्ट में क्या आरोप लगाए गए?


सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ आवासीय सोसायटियों में सामुदायिक कुत्तों को पहले परेशान किया जाता है और फिर उन्हें हमलावर बताकर हटाने की मांग की जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे बहस और बढ़ गई है।


पशु अधिकार कार्यकर्ताओं की राय

पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का क्या कहना है?


पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम सार्वजनिक सुरक्षा और पशु कल्याण के लिए आवश्यक हैं। लेकिन इन अभियानों के दौरान जानवरों के साथ संवेदनशील और मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पशु पकड़ने वाली टीमों को उचित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि किसी भी जानवर को अनावश्यक पीड़ा न हो।


समर्थकों का तर्क

समर्थकों ने क्या तर्क दिया?


कुछ लोगों ने इस कार्रवाई का समर्थन किया है। उनका कहना है कि जाल की मदद से कुत्तों को पकड़ना एक कानूनी और सामान्य प्रक्रिया है, जिसका उपयोग स्थानीय प्रशासन और अधिकृत एजेंसियां लंबे समय से करती आ रही हैं। समर्थकों का तर्क है कि यदि किसी क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती है या लोगों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें आती हैं, तो प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ती है।


लोगों की प्रतिक्रियाएं

लोगों की कैसी रही प्रतिक्रिया?


सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी विभाजित रही हैं। कुछ ने कुत्तों के साथ किए गए व्यवहार की कड़ी आलोचना की और इसे अमानवीय बताया, जबकि अन्य ने कहा कि पशुओं को पकड़ने के लिए यही मानक प्रक्रिया अपनाई जाती है और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।