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पिटबुल के हमले से घायल महिला की दर्दनाक कहानी

एक पिटबुल के हमले में घायल कर्मा डेविस की कहानी सुनकर हर कोई दंग रह जाएगा। मिर्गी के दौरे के दौरान उनके पालतू कुत्ते ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनका चेहरा गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना ने पालतू जानवरों के साथ रहने में सावधानी बरतने की आवश्यकता को उजागर किया है। जानें कैसे इस हादसे ने कर्मा की जिंदगी को बदल दिया।
 

खतरनाक प्यार का नतीजा


पालतू जानवरों को परिवार का हिस्सा मानना एक सामान्य बात है, लेकिन कभी-कभी यह प्यार खतरनाक हो सकता है। अमेरिका के इलिनोइस में 25 वर्षीय कर्मा डेविस के साथ एक ऐसा ही भयानक हादसा हुआ। उन्होंने चार साल से अपने पिटबुल 'फेजो' को पाला था, जिसे वे बेहद प्यार करती थीं। 2 मार्च को जब कर्मा को मिर्गी का दौरा पड़ा और वे बेहोश हो गईं, तब घर में केवल यही कुत्ता मौजूद था। मदद करने के बजाय, फेजो ने उनकी चेहरे पर हमला कर दिया।


बीमार मालकिन पर पिटबुल का हमला

कर्मा डेविस रसोई में कपकेक का आनंद ले रही थीं, तभी अचानक उन्हें दौरा पड़ा और वे गिर गईं। चार साल का उनका पिटबुल फेजो अपनी शिकारी प्रवृत्ति पर काबू नहीं रख सका और महिला के चेहरे को नोंचना शुरू कर दिया। जब कर्मा को होश आया, तो उन्होंने देखा कि चारों ओर खून बिखरा हुआ था। उनका आधा चेहरा गंभीर रूप से घायल हो चुका था। होंठ, बायां गाल, नाक का निचला हिस्सा और कान का एक भाग कुत्ते ने चबा लिया था। दाहिना कान आंशिक रूप से फट गया था, जिसे बाद में सर्जरी से जोड़ा गया। यह घटना पिटबुल जैसी मजबूत नस्ल के कुत्तों की अप्रत्याशित प्रवृत्ति को उजागर करती है।


वीडियो कॉल पर खुला खौफनाक सच

जब कर्मा को होश आया, तो उन्होंने अपने पति को मैसेज किया। पति ने घबराकर वीडियो कॉल की, और दोनों स्तब्ध रह गए। स्क्रीन पर कर्मा का चेहरा देखकर उनकी हालत खराब हो गई। आधा चेहरा लगभग गायब था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें तीन दिन के लिए कोमा में रखा। कई घंटों की सर्जरी के बाद उनकी जान तो बच गई, लेकिन चेहरे की मांसपेशियों और बनावट को ठीक करने में समय लगेगा। फिलहाल, वे ट्यूब से खाना खा रही हैं और प्लास्टिक सर्जरी का सिलसिला जारी है। यह हादसा दिखाता है कि मिर्गी जैसी बीमारियों से ग्रसित लोगों को पालतू जानवरों के साथ अकेले रहने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।


चार साल का साथ, फिर अचानक हिंसा

कर्मा डेविस ने इस कुत्ते को पिछले चार साल से पाला था और उसे परिवार का सदस्य मानती थीं। हादसे के बाद कुत्ते को पकड़ लिया गया और उसे इच्छामृत्यु दे दी गई। कर्मा अब भी सदमे में हैं। वे कहती हैं कि कुत्ते की याद आती है, लेकिन उसे दोबारा घर लाने का ख्याल भी उन्हें डराता है। यह घटना जानवरों की फितरत पर सवाल उठाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिटबुल जैसी मजबूत और आक्रामक नस्ल के कुत्तों को पालते समय ट्रेनिंग, निगरानी और मालिक की स्वास्थ्य स्थिति का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। छोटी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है।