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भारत में एआई क्रांति: युवाओं के लिए नई संभावनाएं और चुनौतियां

भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की क्रांति तेजी से बढ़ रही है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी ने एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण देने का वादा किया है। यह कदम युवाओं के लिए नई संभावनाएं और चुनौतियां लेकर आया है। हालांकि, यह भी सच है कि एआई के बढ़ते उपयोग से कुछ नौकरियों में कमी आ सकती है। जानें कैसे भारत इस नई तकनीकी क्रांति में अपनी भूमिका निभा सकता है और क्या यह केवल एक उपभोक्ता बाजार बने रहने तक सीमित रहेगा।
 

भारत की एआई क्रांति का उदय


इतिहास एक बार फिर अपने को दोहरा रहा है। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए कंप्यूटर क्रांति की नींव रखी गई थी, जिससे भारत 21वीं सदी में प्रवेश कर गया। हालांकि, कंप्यूटर बनाने में भारत को कठिनाई का सामना करना पड़ा। कुछ कंपनियों ने कंप्यूटर का निर्माण शुरू किया, लेकिन ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास नहीं हो सका। इसी तरह, सोशल मीडिया क्रांति में भी भारत केवल उपभोक्ता बना रहा। आज, भारत में एक अरब से अधिक लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।


अब, सूचना प्रौद्योगिकी की तीसरी क्रांति आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के रूप में सामने आई है। भारत एआई टूल्स का सबसे बड़ा उपभोक्ता बन गया है। हाल ही में एक सम्मेलन में, सैम ऑल्टमैन ने बताया कि भारत में उनके एआई प्लेटफॉर्म, चैटजीपीटी का उपयोग 13 करोड़ लोग कर रहे हैं। हालांकि, भारत अभी तक अपना लार्ज लैंग्वेज मॉड्यूल विकसित नहीं कर सका है।


स्वतंत्रता दिवस पर, जो भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस था, प्रधानमंत्री मोदी ने लाल किले से घोषणा की कि उनकी सरकार एक करोड़ युवाओं को एआई का प्रशिक्षण प्रदान करेगी। यह कदम युवाओं के उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी इस दिशा में अपने प्रयासों का उल्लेख किया।


तीस साल पहले, इसी तरह से कंप्यूटर प्रशिक्षण की शुरुआत हुई थी। उस समय, सरकारें हर भाषण में यह दावा करती थीं कि करोड़ों युवाओं को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आज, एआई कंपनियां भी भारत में निवेश कर रही हैं। प्रधानमंत्री के वादे को पूरा करने में ये कंपनियां मदद करेंगी।


हालांकि, यह भी सच है कि एआई के प्रशिक्षण के बाद, सरकारी और निजी कार्यालयों में एआई का उपयोग बढ़ेगा, जिससे कुछ नौकरियों में कमी आ सकती है। इससे राजस्व अमेरिका और अन्य देशों को जाएगा। भारत में एआई के उपयोग से कार्य क्षमता में सुधार होगा, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भारत एक उपभोक्ता बाजार बना रहेगा।


भारत ने न तो आविष्कार किया है और न ही नकल करके अपने उत्पाद विकसित किए हैं। देश के बड़े कारोबारी अमेरिकी कंपनियों के वेंडर बन गए हैं और रिसर्च में निवेश करने से कतराते हैं।