महाराष्ट्र में बेटी के जन्म का अनोखा जश्न, 200 साल बाद आई नन्ही परी
परली में बेटी का जन्म: एक ऐतिहासिक पल
परली: महाराष्ट्र के परली में दहिफले परिवार के लिए एक बेटी का जन्म एक विशेष अवसर बन गया है। इस परिवार में लगभग 200 वर्षों बाद पहली बार बेटी का आगमन हुआ है। इस खुशी को मनाने के लिए परिवार ने ऐसा जश्न आयोजित किया, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। गुरुवार को परिवार की छोटी बहू कल्पना ने एक नन्ही बच्ची को जन्म दिया। मां और नवजात को शनिवार को अस्पताल से छुट्टी मिली।
जश्न का अनोखा तरीका
बच्ची को घर लाने के लिए परिवार ने सामान्य तरीके से नहीं, बल्कि सजाए गए रथ में बैठाकर पूरे उत्साह के साथ घर पहुंचाया। बच्ची के आगमन पर परिवार और रिश्तेदारों ने खुशी मनाई। पूरे रास्ते ढोल-नगाड़े बजाए गए और आतिशबाजी की गई। घर को फूलों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया था।
महाराष्ट्र के बीड के दहिफले परिवार में एक बच्ची के जन्म से खुशियों की लहर दौड़ गई, क्योंकि रिश्तेदारों के मुताबिक करीब 200 साल बाद परिवार में बेटी का जन्म हुआ है. नवजात बच्ची को अस्पताल से ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और मिठाइयों के साथ सजी हुई रथ में घर लाया गया.#beed #maharashtra… pic.twitter.com/uiRlRfNurx
— News Media (@NewsMedia) September 3, 2026
घर में स्वागत की धूमधाम
रथ में पहुंची बच्ची:
जब रथ में मां और बच्ची घर पहुंची, तो वहां पहले से ही रिश्तेदार, दोस्त और शुभचिंतक मौजूद थे। परिवार के सदस्यों ने बच्ची की आरती उतारी और उसका स्वागत किया। इस खुशी के मौके पर मिठाई बांटी गई, खासकर जलेबी का वितरण किया गया।
परिवार के लिए विशेष महत्व
परिवार के लिए बेहद खास है यह बच्ची:
भगवान प्राइमरी स्कूल, परली के हेडमास्टर लिंबाजी दहिफले अपनी पोती के जन्म से अत्यंत खुश हैं। परिवार के अनुसार, उनके परिवार में लगभग 200 वर्षों से किसी बेटी का जन्म नहीं हुआ था। इस नन्ही बच्ची का आगमन परिवार के लिए एक बड़ी खुशी का कारण है। परिवार ने इसे केवल पारिवारिक खुशी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे बड़े स्तर पर मनाकर समाज के सामने एक उदाहरण पेश किया।
सामाजिक संदेश का महत्व
बेटी के जन्म पर दिया खास सामाजिक संदेश:
आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटे के जन्म को बेटी की तुलना में अधिक महत्व दिया जाता है। ऐसे माहौल में दहिफले परिवार का यह कदम एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। परिवार ने दिखाया कि बेटी का जन्म भी उतनी ही खुशी और गर्व का अवसर है, जितना बेटे का जन्म। बेटियां परिवार के लिए बोझ नहीं, बल्कि खुशी और आशीर्वाद होती हैं।