मिजोरम का वीडियो: ट्रेन सफाई में नागरिक जिम्मेदारी का अनूठा उदाहरण
सफाई की जिम्मेदारी: मिजोरम का प्रेरणादायक वीडियो
सोशल मीडिया पर अक्सर अव्यवस्था से भरे वीडियो देखने को मिलते हैं, लेकिन मिजोरम से आया एक वीडियो लोगों की सोच को बदलने में सफल रहा है। आइजोल से गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन का यह वीडियो दर्शाता है कि जब नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, तो सार्वजनिक स्थान कितने साफ-सुथरे रह सकते हैं। यात्रियों का यह व्यवहार सोचने पर मजबूर करता है।
सोशल मीडिया पर मिजोरम का वीडियो वायरल
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर @daily.passenger द्वारा साझा किया गया है। क्लिप में साफ-सुथरे ट्रेन डिब्बों को दिखाया गया है, जहां यात्री सफर के दौरान सफाई बनाए रखने में सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छाया मिजोरम का वीडियो
मिजोरम से आया यह दृश्य सोशल मीडिया पर गंदगी से जुड़े अन्य वीडियो से बिल्कुल अलग है। यह वीडियो दिखाता है कि जब लोग अपनी जिम्मेदारी लेते हैं, तो सार्वजनिक स्थान कितने व्यवस्थित रह सकते हैं। यात्रियों का यह व्यवहार आत्ममंथन के लिए प्रेरित करता है।
इंस्टाग्राम पोस्ट ने खींचा लोगों का ध्यान
इंस्टाग्राम पर @daily.passenger द्वारा साझा किया गया यह वीडियो ट्रेन के अंदर की स्थिति को दर्शाता है, जहां कोच न केवल साफ हैं, बल्कि यात्री भी सफाई बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। यह अनुभव आम ट्रेन यात्राओं से भिन्न है, जहां सफाई की जिम्मेदारी अक्सर कर्मचारियों पर होती है।
कचरा संभालने का सादा लेकिन असरदार तरीका
वीडियो में देखा जा सकता है कि यात्री अपने खाने-पीने के बाद कचरे को छोटी पॉलीथीन थैलियों में इकट्ठा करते हैं और इन्हें अपनी सीट के पास लटका देते हैं, जिससे कचरा फैलता नहीं है। इससे सफाई कर्मचारियों को भी सुविधा मिलती है और पूरा डिब्बा यात्रा के दौरान साफ बना रहता है।
बिना नियम और जुर्माने के निभाई गई जिम्मेदारी
यूजर ने बताया कि ट्रेन में कोई घोषणा नहीं की गई थी और न ही रेलवे की ओर से कोई सख्त निर्देश थे। इसके बावजूद यात्री स्वेच्छा से सफाई का ध्यान रख रहे थे। यह दिखाता है कि स्वच्छता केवल नियमों से नहीं, बल्कि आदत और संस्कार से आती है।
उत्तर-पूर्व की सोच और संस्कृति की झलक
पोस्ट में यह भी बताया गया कि उत्तर-पूर्वी भारत में साफ-सफाई केवल घरों तक सीमित नहीं रहती। सार्वजनिक परिवहन और साझा स्थानों को भी उतना ही सम्मान दिया जाता है। लोग ट्रेन को भी अपने घर की तरह मानते हैं और उसे गंदा करने से बचते हैं।
आत्ममंथन को मजबूर करता अनुभव
यूजर ने लिखा कि इस अनुभव ने उन्हें गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया। हम अक्सर गंदी ट्रेनों और सड़कों की शिकायत करते हैं, लेकिन अपने व्यवहार पर कम ही ध्यान देते हैं। साफ जगहें लोगों की जिम्मेदारी से ही साफ रहती हैं।
नागरिक भावना पर उम्मीद की किरण
यह वीडियो अब लाखों लोगों तक पहुंच चुका है और नागरिक भावना पर चल रही बहस में एक सकारात्मक उदाहरण बन गया है। ऐसे समय में जब सार्वजनिक स्थानों की स्थिति पर निराशा दिखती है, यह वीडियो याद दिलाता है कि जिम्मेदार नागरिकता आज भी भारत में जीवित है।