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सचिन अवस्थी की दक्षिण कोरिया यात्रा: हिरासत में 38 घंटे का अनुभव

भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सचिन अवस्थी की जेजू द्वीप यात्रा एक भयावह अनुभव में बदल गई। उन्हें हिरासत में लिया गया और 38 घंटों तक मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। सचिन ने अपनी कहानी साझा की है, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें बिना किसी स्पष्ट कारण के हिरासत में लिया गया और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। जानें इस घटना के बारे में और सचिन के अनुभव के बारे में अधिक जानकारी।
 

सचिन अवस्थी की डरावनी यात्रा


नई दिल्ली: भारतीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सचिन अवस्थी की दक्षिण कोरिया की यात्रा एक भयावह अनुभव में बदल गई। उन्होंने बताया कि जेजू द्वीप पर पहुंचते ही उन्हें हिरासत में लिया गया और अगले 38 घंटों तक मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।


सचिन ने इंस्टाग्राम पर अपनी कहानी साझा करते हुए कहा कि वे जेजू द्वीप पर बहुत उत्साहित होकर पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही घंटों में हालात पूरी तरह बदल गए। इमिग्रेशन अधिकारियों ने बिना किसी स्पष्ट कारण के उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया और एक 'होल्डिंग एरिया' में भेज दिया।


उनका आरोप है कि उन्हें एक ऐसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया जो जेल जैसा था, जहां न तो सूरज की रोशनी थी और न ही बाहरी दुनिया से संपर्क का कोई साधन। उन्हें वहां 'जेल का खाना' दिया गया और कथित तौर पर महंगे रिटर्न टिकट बुक करने के लिए ब्लैकमेल किया गया।




चीन में भी कड़ी निगरानी


सचिन के अनुसार, यह उत्पीड़न चीन में ट्रांजिट के दौरान भी जारी रहा। उन्होंने कहा कि वहां उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। संचार के साधनों पर पाबंदी थी और उन्हें फोन का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। भोजन और पानी की भारी कमी के साथ-साथ सोने की स्थिति भी अत्यंत खराब थी। सबसे चौंकाने वाला यह था कि टॉयलेट जाने के लिए भी एक पुलिस अधिकारी उनके साथ जाता था।


हम अपराधी नहीं थे


अंततः, अधिकारियों ने उन्हें भारत वापस भेजने का निर्णय लिया, लेकिन इसके लिए उन्हें सामान्य से लगभग 10 गुना अधिक कीमत पर रिटर्न टिकट बुक करने के लिए मजबूर किया गया। सचिन ने कहा, 'उस समय हम इतने थक चुके थे कि बहस करने की शक्ति नहीं थी। हम बस सुरक्षित बाहर निकलना चाहते थे।' उन्होंने यह जानकारी अन्य यात्रियों को जागरूक करने के लिए साझा की है।



सचिन का कहना है कि इमिग्रेशन को प्रवेश से इनकार करने का अधिकार है, लेकिन निर्दोष यात्रियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना गलत है। उन्होंने इस घटना पर अपने यूट्यूब चैनल पर एक विस्तृत वीडियो भी साझा किया है।