सारा बलोच का नाम लेकर वायरल हो रहा फर्जी MMS वीडियो: जानें सच
वायरल वीडियो की नई कहानी
हाल ही में, 19 और 17 मिनट के पुराने वायरल क्लिप्स के बाद, एक और तथाकथित "वायरल एमएमएस वीडियो" तेजी से सोशल मीडिया पर फैल रहा है, जिसमें सारा बलोच का नाम शामिल किया गया है। यह वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्मों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि इसे असम से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे लोगों की जिज्ञासा और बढ़ गई है। लेकिन असलियत इससे बिल्कुल भिन्न है।
सारा बलोच: एक परिचय
सारा बलोच एक प्रसिद्ध पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं, जो इंस्टाग्राम और टिकटॉक पर लाइफस्टाइल, फैशन और यात्रा से संबंधित वीडियो साझा करती हैं। उनके फॉलोअर्स की संख्या काफी अधिक है और उनकी पोस्ट पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है। इसी लोकप्रियता का लाभ उठाते हुए साइबर अपराधी उनके नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं। बिना उनकी अनुमति के पुराने वीडियो क्लिप और तस्वीरों को जोड़कर एक झूठी कहानी बनाई जा रही है।
वायरल वीडियो की सच्चाई
जिस 'एमएमएस वीडियो' की चर्चा हो रही है, वह असली नहीं है। यह वीडियो विभिन्न पुराने क्लिप्स को संपादित करके बनाया गया है। इसके साथ भड़काऊ टेक्स्ट और धुंधली तस्वीरें जोड़ दी गई हैं, ताकि लोग इसे सच मान लें। असल में, यह एक जाल है, जिसका उद्देश्य लोगों को फर्जी वेबसाइट पर ले जाना और उनका डेटा चुराना है।
असम का नाम क्यों जोड़ा गया?
इस फर्जी वीडियो को विश्वसनीयता देने के लिए इसमें "असम की घटना" जैसा एंगल जोड़ा गया है। पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि वीडियो किसी स्थानीय घटना से संबंधित है, जबकि ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं है। असम का नाम केवल इसलिए जोड़ा गया है ताकि भारत के लोग अधिक संख्या में लिंक पर क्लिक करें।
स्कैम का तरीका
इस प्रकार के फिशिंग स्कैम का तरीका लगभग समान होता है। सबसे पहले सनसनीखेज हेडलाइन और किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की तस्वीर लगाई जाती है। इसके बाद लिंक दिया जाता है, जो किसी न्यूज वेबसाइट के बजाय संदिग्ध पेज पर ले जाता है। वहां यूजर से "उम्र सत्यापन" या सोशल मीडिया लॉगिन करने को कहा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति जानकारी भरता है, उसका डेटा हैकर्स के पास पहुंच जाता है। कई मामलों में लिंक पर क्लिक करने से फोन में मैलवेयर या स्पाइवेयर भी इंस्टॉल हो सकता है।
स्कैम की पहचान कैसे करें?
कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि किसी विदेशी इन्फ्लुएंसर को अचानक किसी स्थानीय घटना से जोड़ा जा रहा हो, तो सतर्क रहें। अजीब या छोटे यूआरएल लिंक पर भरोसा न करें। यदि कोई पेज वीडियो देखने से पहले लिंक शेयर करने को कहे, तो समझ लें कि यह धोखा है।
अगर लिंक मिल जाए तो क्या करें?
सबसे पहले उस लिंक पर क्लिक न करें और उसे आगे शेयर न करें। संदेश को डिलीट कर दें और भेजने वाले को सावधान करें। फोन की ब्राउजर हिस्ट्री और कैश साफ करें। अनजान ऐप्स और संदिग्ध परमिशन को तुरंत हटाएं। बैंकिंग और सोशल मीडिया अकाउंट में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें।