×

अमेरिका-इजरायल का ईरान के खिलाफ संघर्ष: अंतरराष्ट्रीय समर्थन की कमी

हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया, जिसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना था। हालांकि, अमेरिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन नहीं मिला, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका अकेला पड़ गया है। यूरोपीय और एशियाई देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जबकि ट्रंप के खिलाफ अमेरिका में विरोध बढ़ रहा है। जानें इस संघर्ष की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

संयुक्त हमले का उद्देश्य

हाल ही में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया, जिसमें ईरान को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया। ट्रंप प्रशासन और इजरायल का मुख्य लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमताओं और सैन्य ताकत को नष्ट करना था। इसके साथ ही, दोनों देशों ने ईरान में राजनीतिक बदलाव लाने की भी कोशिश की। हालांकि, ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए मिसाइलों और ड्रोन से हमले किए, जिससे अमेरिका के कई एयर बेस को नुकसान हुआ और होमुर्ज स्ट्रेट के माध्यम से अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिका ने यूरोपीय संघ, रूस, चीन, ऑस्ट्रेलिया और जापान से मदद मांगी, लेकिन किसी ने भी अमेरिका का समर्थन नहीं किया। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका अकेला पड़ गया है। ईरान ने अमेरिका के सामने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया है, और युद्ध को दो हफ्तों के लिए स्थगित किया गया है ताकि शांति की संभावनाएं तलाश की जा सकें।


यूरोप का ठंडा रुख

यूरोप के कई देश नाटो का हिस्सा हैं, जिसे अमेरिका लीड करता है। हालांकि, नाटो के सदस्य देशों ने ईरान के हमलों की निंदा की, लेकिन किसी ने भी अमेरिका का समर्थन नहीं किया। ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और स्पेन जैसे देशों ने अमेरिका के लिए अपने एयरस्पेस का उपयोग करने से मना कर दिया। ट्रंप ने यूरोपीय देशों को कायर बताया, जबकि यूरोप ने कहा कि यह युद्ध अनावश्यक है।


एशियाई देशों की चुप्पी

खाड़ी के देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और बहरीन ने अमेरिका के कारण इस संघर्ष में भाग लिया, लेकिन ईरान के हमलों के बाद भी उन्होंने अमेरिका का सार्वजनिक समर्थन नहीं किया। इन देशों ने ईरान पर जवाबी हमला करने से भी परहेज किया, क्योंकि इससे उनकी घरेलू जनता नाराज हो सकती थी।


अमेरिका में ट्रंप का विरोध

ईरान पर हमले के बाद अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ विरोध बढ़ रहा है। लोग मानते हैं कि यह युद्ध महंगा साबित हो रहा है और अरबों डॉलर खर्च हो रहे हैं। अमेरिकी नागरिकों का कहना है कि यह संघर्ष इजरायल का है, लेकिन अमेरिका इसे लड़ रहा है। इसके विरोध में लगभग एक करोड़ लोगों ने प्रदर्शन किया। ऑस्ट्रेलिया ने भी अमेरिका का समर्थन किया, लेकिन सैन्य भागीदारी से दूरी बनाए रखी।