अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव: ट्रंप का प्रस्ताव खारिज
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की नई लहर
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। इसका मुख्य कारण डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के सात दिवसीय योजना को अस्वीकार करना है। इस योजना में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने, युद्ध समाप्त करने और परमाणु वार्ता शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। ट्रंप ने टेनेसी के लिए रवाना होते समय कहा कि उन्होंने ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है।
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने ट्रुथ सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' के रूप में दर्शाया गया। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि यदि अमेरिका ईरान की शर्तों पर सहमत होता है, तो वे सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल देंगे। लेकिन ट्रंप के प्रस्ताव को अस्वीकार करने के बाद, सीधा संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।
ईरान ने होर्मुज को खोलने के लिए ट्रंप के सामने कुछ शर्तें रखी थीं। तेहरान का कहना है कि यदि अमेरिका ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी को समाप्त करता है, तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाता है और लेबनान में युद्धविराम लागू करता है, तो वे होर्मुज को सात दिनों में खोल देंगे।
ट्रंप का भूगोल और नाम बदलने का शौक
यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने होर्मुज को 'स्ट्रेट ऑफ ट्रंप' कहा है। दो सितंबर को उन्होंने इसे 'ट्रंप स्ट्रेट' बताया था। वे होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने के विचार की भी सराहना कर चुके हैं। ट्रंप को नाम बदलने का बड़ा शौक है और वे अपने अनुसार भूगोल को परिभाषित करते हैं।
उदाहरण के लिए, ट्रंप ने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर 'गल्फ ऑफ अमेरिका' रखा है। इसके अलावा, उन्होंने न्यू मैक्सिको का नाम बदलकर 'न्यू अमेरिका' रखने का प्रस्ताव भी दिया था। पिछले साल, उन्होंने अलास्का की सबसे ऊंची चोटी 'डेनाली' का नाम 'माउंट मैककिन्ली' रखा था। कनाडा के साथ बढ़ते तनाव के बीच, उन्होंने लेक ओंटारियो का नाम 'लेक अमेरिका' भी रखा है।
ईरान का अमेरिका पर विश्वास खत्म
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि राष्ट्रपति ट्रंप को शक है कि ईरान उनकी मांगों को पूरा नहीं करेगा। इस बीच, अल जजीरा से बातचीत में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि तेहरान अब अमेरिका पर भरोसा नहीं करता। उन्होंने पिछली बातचीत के दौरान हमले और प्रतिबंधों को इसका कारण बताया।