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अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौता: 60 दिनों की शांति की उम्मीद

अमेरिका और ईरान ने एक महत्वपूर्ण युद्धविराम समझौते पर सहमति जताई है, जो अगले 60 दिनों के लिए संघर्ष को समाप्त करेगा। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला जाएगा, जिससे वैश्विक तेल परिवहन शुरू होगा। दोनों देशों के बीच यह समझौता वैश्विक दबाव के चलते हुआ है, और इसे कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। जानें इस समझौते की मुख्य बातें और इसके संभावित प्रभाव।
 

समझौते की घोषणा

रविवार को अमेरिका और ईरान ने एक युद्धविराम समझौते पर सहमति जताई है, जो लगभग चार महीने से चल रहे संघर्ष को अगले 60 दिनों के लिए समाप्त करेगा। इस अवधि में दोनों देश आगे की वार्ता करेंगे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस समझौते की पुष्टि की है, जबकि ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी इसे मान्यता दी है।


कूटनीतिक जीत

दोनों पक्ष इसे अपनी कूटनीतिक सफलता मान रहे हैं। इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को जिनेवा में किए जाएंगे, जो कि 47 वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच उच्चतम स्तर की पहली बैठक होगी। पाकिस्तान और कतर ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थता की है।


समझौते की मुख्य बातें

समझौते के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को तुरंत खोला जाएगा, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल परिवहन शुरू हो सकेगा। अमेरिका अपनी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी समाप्त करेगा। ट्रंप ने कहा है कि जहाजों के इंजन चालू कर दिए जाएं और तेल का व्यापार फिर से शुरू हो।


समझौते की आवश्यकता

यह संघर्ष चार महीने से जारी है और इसे वैश्विक आर्थिक संकट का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। तेल और गैस की आपूर्ति में गंभीर बाधाएं आई हैं, जिससे भारत जैसे बड़े देशों में ईंधन की कमी हो गई है। वैश्विक दबाव के चलते समझौते की आवश्यकता महसूस की गई।


60 दिनों में क्या होगा?

समझौते में लेबनान में चल रहे इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष को रोकने का भी उल्लेख है। ईरान का परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने के मुद्दे पर 60 दिनों की बातचीत में निर्णय लिया जाएगा।


ट्रंप का बयान

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका हमला और नाकाबंदी ईरान को समझौते के लिए मजबूर करने में सफल रही। उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आलोचना की, जिन्होंने लेबनान में हमले कर समझौते को खतरे में डाला।


इजरायल की प्रतिक्रिया

इजरायल इस समझौते से संतुष्ट नहीं है। वह चाहता था कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह समाप्त हो और हिजबुल्लाह जैसी प्रॉक्सी सेनाओं पर नियंत्रण हो।


बाजारों पर प्रभाव

समझौते की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत कम हो गई है। शेयर बाजार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। यदि स्थिति सामान्य रही, तो वैश्विक तेल संकट से राहत मिल सकती है।


ईरानी नागरिकों की प्रतिक्रिया

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के नागरिक राहत महसूस कर रहे हैं। युद्ध के कारण अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा था, और लोग आशा कर रहे हैं कि यह राहत स्थायी हो।


समझौते की प्रक्रिया

28 फरवरी को हुए हमले के चार महीने बाद दोनों देशों ने समझौते पर सहमति बनाई। पाकिस्तान के आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री ने शांति की पहल की थी। जून 2025 में मुनीर की ट्रंप से मुलाकात और ईरान के साथ संपर्क ने समझौते का आधार तैयार किया।