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अमेरिका ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाए, मजदूरी के मुद्दे पर उठाया कदम

अमेरिका ने 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जो 10 से 12.5 प्रतिशत के बीच हैं। यह कदम जबरन मजदूरी के मुद्दे पर आधारित है और इसका असर अमेरिका के कुल आयात का 99.4 प्रतिशत होगा। इस फैसले की वैश्विक स्तर पर आलोचना हो रही है, खासकर ब्राजील और जापान जैसे देशों से। जानें इस निर्णय का वैश्विक व्यापार पर क्या प्रभाव पड़ेगा और डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर क्या प्रतिक्रियाएं हैं।
 

नए टैरिफ का प्रभाव

अमेरिका ने लगभग 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत के बीच नए आयात शुल्क लागू करने का निर्णय लिया है। ये शुल्क शुक्रवार से प्रभावी होंगे। अमेरिका का दावा है कि ये देश जबरन मजदूरी से निर्मित उत्पादों को रोकने में असफल रहे हैं। इस निर्णय का असर अमेरिका के कुल आयात का 99.4 प्रतिशत पर पड़ेगा।


व्यापार प्रतिनिधि की टिप्पणी

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर ने बताया कि यह कदम श्रमिकों की स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। ब्राजील सरकार ने इस निर्णय को अनुचित और मनमाना करार दिया है। अमेरिका के इस फैसले की व्यापक आलोचना हो रही है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी कई प्रकार के टैरिफ लागू किए हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी है।


जबरन मजदूरी पर टैरिफ का विवरण

इन अमेरिकी प्रतिबंधों में ब्रिटेन, चीन, यूरोपीय संघ, कनाडा, जापान और भारत जैसे कई प्रमुख देश शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये टैरिफ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और अनुचित व्यापार को रोकने के लिए लगाए गए हैं। जिन देशों ने मजबूर मजदूरी वाले सामान पर प्रतिबंध लगाने का वादा किया है, उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा, जबकि जो ऐसा नहीं करेंगे, उन पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा।


वैश्विक प्रतिक्रिया

ब्राजील ने आरोप लगाया है कि अमेरिका मजदूर अधिकारों के मुद्दे का उपयोग अपनी संरक्षणवादी नीतियों के लिए कर रहा है और वह जवाबी कदम उठाने की योजना बना रहा है। जापान ने इस फैसले पर खेद व्यक्त किया है, यह कहते हुए कि उसका व्यापार अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप है। ऑस्ट्रेलिया के व्यापार मंत्री ने भी इन टैरिफ को अनुचित बताया और कहा कि उनका देश अमेरिका से सभी शुल्क हटवाने की कोशिश करेगा।


टैरिफ नीति पर ट्रंप का दृष्टिकोण

डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से टैरिफ को अमेरिकी श्रमिकों की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का एक साधन मानते हैं। उन्होंने पहले भी कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं, जिनमें से कई को अदालतों ने रद्द कर दिया था। अब वह वैकल्पिक कानूनी रास्तों से टैरिफ लागू कर रहे हैं, जबकि उनकी टैरिफ नीतियों का अमेरिका में विरोध भी हो रहा है।