अमेरिका में मिडटर्म चुनाव: भारतीय मूल के मतदाताओं की भूमिका
मिडटर्म चुनावों की तैयारी
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनावों पर चर्चा तेज हो गई है, जिसमें भारतीय मूल के लोगों की भागीदारी पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लगभग 56 लाख भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं, लेकिन इनमें से केवल 26 लाख लोग ही मतदान का अधिकार रखते हैं। कुल मतदाताओं में उनकी हिस्सेदारी मात्र 1 प्रतिशत है। फिर भी, भारतीय मूल के लोगों की अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
भारतीय मूल के मतदाताओं की संख्या
अमेरिका के 7 राज्यों, जैसे एरिजोना, जॉर्जिया, मिशिगन, नेवाडा, नॉर्थ कैरोलिना, पेंसिल्वेनिया और विस्कॉन्सिन में भारतीयों की जनसंख्या काफी अच्छी है, जिससे इन राज्यों में भारतीय अमेरिकी मतदाताओं की भूमिका महत्वपूर्ण बनती है। 2023 की जनगणना के अनुसार, भारतीय मूल के लोगों की संख्या 52 लाख से अधिक है, जिनमें से 39 लाख लोग 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के हैं।
क्या हर भारतीय वोट दे सकता है?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका में हर भारतीय नागरिक चुनावों में वोट नहीं दे सकता। मतदान का अधिकार केवल उन लोगों को है जो अमेरिकी नागरिक हैं। भारतीय मूल का होना, अमेरिका में पढ़ाई या नौकरी करना मतदान का अधिकार नहीं देता। राष्ट्रपति और कांग्रेस के चुनावों में वोट देने के लिए व्यक्ति का अमेरिकी नागरिक होना आवश्यक है।
ग्रीन कार्ड धारक और मतदान
ग्रीन कार्ड धारक अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति प्राप्त करते हैं, लेकिन इससे उन्हें अमेरिकी नागरिकता नहीं मिलती। इसलिए, ग्रीन कार्ड धारक राष्ट्रपति और कांग्रेस के चुनावों में वोट नहीं दे सकते। एच-1बी, छात्र या अन्य वीजा पर रहने वाले भारतीय भी बिना अमेरिकी नागरिकता के संघीय चुनावों में मतदान नहीं कर सकते।
भारतीय-अमेरिकियों का राजनीतिक झुकाव
अमेरिका के दो पार्टी सिस्टम में भारतीय-अमेरिकी मतदाता आमतौर पर डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर अधिक झुकाव रखते हैं। हाल के सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लगभग 66 प्रतिशत भारतीय मूल के एशियाई अमेरिकी अभी भी डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रति वफादार हैं। हालांकि, 2026 के चुनावों में एक वित्तीय विभाजन देखने को मिल रहा है, जिसमें अमीर भारतीय अमेरिकी अब रिपब्लिकन पार्टी की ओर बढ़ रहे हैं।