एच-1बी वीजा प्रोग्राम पर नया संकट: अमेरिकी सांसदों का प्रस्ताव
एच-1बी वीजा प्रोग्राम पर खतरा
डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के दौरान अमेरिका में एच-1बी वीजा प्रोग्राम को लेकर एक नया संकट उत्पन्न हो गया है। कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने कांग्रेस में एक नया विधेयक पेश किया है, जिसमें एच-1बी वीजा प्रोग्राम को तीन वर्षों के लिए पूरी तरह से निलंबित करने की मांग की गई है.
पिछले प्रस्तावों का प्रभाव
इससे पहले, ट्रंप प्रशासन ने नए एच-1बी आवेदनों पर एक लाख डॉलर का भारी शुल्क लगाने का निर्णय लिया था। यह नया विधेयक भारतीय आईटी पेशेवरों और अन्य विदेशी श्रमिकों के लिए चुनौतियाँ बढ़ा सकता है.
विधेयक का विवरण
एरिज़ोना के कांग्रेसमैन एली क्रेन द्वारा पेश किया गया 'End H-1B Visa Abuse Act of 2026' नामक यह विधेयक सात अन्य रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन प्राप्त कर चुका है, जिनमें टेक्सास के ब्रायन बेबिन, ब्रैंडन गिल, वेस्ले हंट, कीथ सेल्फ, टेनेसी के एंडी ओगल्स, एरिज़ोना के पॉल गोसार और कैलिफोर्निया के टॉम मैक्लिंटॉक शामिल हैं.
विधेयक में प्रस्तावित परिवर्तन
यह विधेयक एच-1बी वीजा प्रोग्राम में कई महत्वपूर्ण बदलाव लाने का इरादा रखता है, जैसे कि:
- हर वर्ष मिलने वाले वीजा की संख्या को 65,000 से घटाकर 25,000 करना।
- न्यूनतम वार्षिक वेतन 2 लाख डॉलर अनिवार्य करना।
- एच-1बी वीजा धारक अपने परिवार को अमेरिका नहीं ला सकें।
- लॉटरी प्रणाली को समाप्त कर वेतन के आधार पर वीजा देना।
- कंपनियों को यह साबित करना होगा कि अमेरिकी श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं और हाल में छंटनी नहीं की गई है।
- एच-1बी धारक एक से अधिक स्थानों पर काम नहीं कर सकेंगे।
- थर्ड-पार्टी स्टाफिंग एजेंसियों द्वारा इन्हें हायर नहीं किया जा सकेगा।
- सरकारी विभाग विदेशी श्रमिकों को हायर नहीं कर सकेंगे।
- ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) समाप्त हो जाएगी।
- एच-1बी से ग्रीन कार्ड में परिवर्तन कठिन हो जाएगा।
- वीजा बदलने से पहले व्यक्ति को अमेरिका छोड़ना पड़ेगा।
भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव
एच-1बी वीजा का सबसे अधिक उपयोग भारतीय तकनीकी पेशेवर करते हैं। अमेरिकी तकनीकी कंपनियाँ बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियरों और स्वास्थ्य पेशेवरों को नियुक्त करती हैं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो हजारों भारतीयों की नौकरियों और उनके परिवारों के अमेरिका में रहने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.
सांसदों की प्रतिक्रियाएँ
कांग्रेसमैन एली क्रेन ने कहा, 'सरकार को अमेरिकी नागरिकों के लिए काम करना चाहिए, न कि बड़ी कंपनियों के लाभ के लिए। हमें एच-1बी प्रणाली में सुधार करना चाहिए ताकि योग्य अमेरिकी श्रमिकों को अपनी नौकरियों से बाहर न होना पड़े।' पॉल गोसार ने आरोप लगाया कि एच-1बी प्रोग्राम को 'हाईजैक' किया गया है ताकि सस्ते विदेशी श्रमिकों से अमेरिकी श्रमिकों को बदला जा सके.
क्या यह विधेयक लागू होगा?
ह्यूस्टन के इमिग्रेशन एडवोकेट राहुल रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस के पास वीजा प्रोग्राम को रोकने का अधिकार है। यदि कांग्रेस इसे फ्रीज करती है, तो सरकार को इसे लागू करना होगा। यदि यह विधेयक लागू होता है, तो एच-1बी धारकों को या तो अमेरिका छोड़ना पड़ेगा या अन्य वीजा पर स्विच करना होगा.
वर्तमान स्थिति
यह विधेयक अभी केवल प्रस्तावित है। इसे कानून बनने में समय लगेगा और इससे पहले इस पर काफी बहस होगी। लेकिन ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल में एच-1बी पर सख्ती बढ़ रही है, जो भारतीय आईटी उद्योग और विदेश में काम करने वाले युवाओं के लिए चिंता का विषय है.