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जॉर्डन में अमेरिका-ईरान संघर्ष: हालिया हमलों की स्थिति

जॉर्डन में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच हालिया हमलों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिकों पर लगातार हमले किए हैं, जिससे कई सैनिक घायल हुए हैं और कुछ की जान भी गई है। अमेरिकी दूतावास ने नागरिकों को सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। जानें, जॉर्डन में ईरान के हमलों की श्रृंखला और इसके पीछे के रणनीतिक कारण।
 

जॉर्डन में बढ़ते तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में जॉर्डन एक गंभीर युद्धक्षेत्र बन गया है। पिछले पांच दिनों में, ईरान ने अमेरिकी बलों पर चौथी बार हमला किया, जिसमें शुक्रवार को दो सैनिकों की मौत हो गई और एक सैनिक लापता है। इन हमलों के परिणामस्वरूप कई हेलीकॉप्टर भी क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई सैनिक घायल हुए हैं। रविवार को, अमेरिकी दूतावास ने एक विश्वसनीय खतरे के कारण अकाबा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और बंदरगाह को खाली करने की सूचना दी।


दूतावास की चेतावनी

अमेरिकी दूतावास ने एक बयान में सभी अमेरिकियों को सलाह दी है कि वे हवाई अड्डे या बंदरगाह की यात्रा से बचें और जॉर्डन के अधिकारियों के सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। इसके अलावा, उन्होंने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की यात्रा से भी बचने की सलाह दी।


हमलों की श्रृंखला

जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमलों की श्रृंखला इस प्रकार है: पहला हमला किंग फैसल एयरबेस पर हुआ, जिसमें पांच सैनिक घायल हुए। दूसरा हमला पूर्वी जॉर्डन के एक बेस पर हुआ, जहां कई ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों को नुकसान पहुंचा। तीसरा हमला मुवफ्फक साल्टी एयरबेस पर मिसाइल से किया गया, जिसमें 20 सैनिक घायल हुए। चौथा हमला शुक्रवार को साल्टी लेक पर हुआ, जिसमें दो सैनिकों की मौत और चार अन्य घायल हुए।


ईरान का जॉर्डन पर ध्यान

जॉर्डन, जो इजरायल के निकट स्थित है, अमेरिका के लिए एक रणनीतिक स्थान है। यहां कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने हैं। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद, कई खाड़ी देशों ने अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को सीमित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप, अमेरिका ने अपने सैनिकों और साजो-सामान को जॉर्डन में स्थानांतरित किया। ईरान अब जॉर्डन को अधिक निशाना बना रहा है, ताकि अन्य खाड़ी देशों को यह संदेश दिया जा सके कि अमेरिकी सेना की मेज़बानी की कीमत क्या होती है।