डोनाल्ड ट्रंप का चुनावी तंत्र पर गंभीर आरोप
ट्रंप का चुनावी तंत्र पर बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि अमेरिका का चुनावी तंत्र कमजोर है। उन्होंने आरोप लगाया कि मृत लोग वोट डालते हैं और कई लोग जिनके पास अमेरिकी नागरिकता नहीं है, वे भी चुनाव में भाग लेते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि कुछ देश, जैसे चीन, अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने इस संदर्भ में कई दस्तावेजों और खुफिया रिपोर्टों का उल्लेख किया।
ट्रंप की चिंताएँ
गुरुवार रात अपने संबोधन में, ट्रंप ने कहा कि मौजूदा वोटिंग और मेल-इन वोटिंग प्रणाली सुरक्षित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी सरकारों के हाथों में करोड़ों अमेरिकी वोटरों की जानकारी पहुंच गई है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वोट गिनने वाली मशीनें हैक की जा सकती हैं और वोटर लिस्ट में अभी भी लाखों गैर-नागरिकों और मृत लोगों के नाम मौजूद हैं।
ट्रंप के प्रस्तावित बदलाव
डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में वोटर आईडी और नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता की मांग की है। उन्होंने मेल-इन वोटिंग पर सख्त रोक लगाने की बात भी कही। ट्रंप ने 2020 के चुनाव में धांधली के पुराने आरोपों को फिर से उठाया और कहा कि सबूतों को दबाया गया।
डीप स्टेट का आरोप
ट्रंप ने 'डीप स्टेट' पर भी आरोप लगाया कि खुफिया एजेंसियों ने 2020 में चीन के हस्तक्षेप की जानकारी छिपाई। उन्होंने कहा कि ये एजेंसियां उनकी सरकार में भी काम कर रही थीं। अमेरिका में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ 'डीप स्टेट' शब्द का अक्सर इस्तेमाल होता है।
व्हाइट हाउस की नई पहल
ट्रंप के भाषण के बाद, व्हाइट हाउस ने एक नई वेबसाइट लॉन्च की है, जिसमें कुछ पुरानी खुफिया रिपोर्टें साझा की गई हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया था कि रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया चुनावी सिस्टम तक पहुंच सकते हैं, लेकिन इसके लिए कोई ठोस सबूत नहीं मिला कि उन्होंने वोट चुराए। ट्रंप ने अमेरिकी संसद से 'सेव अमेरिका एक्ट' पास करने की अपील की, हालांकि यह कानून इस साल के चुनाव पर प्रभाव नहीं डालेगा।