अल्जीरिया और यूएई के बीच बढ़ते तनाव के कारण
अल्जीरिया ने यूएई से तोड़े संबंध
अफ्रीकी राष्ट्र अल्जीरिया ने 10 सितंबर को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ अपने राजनयिक संबंध समाप्त कर दिए। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद अब गहरे हो गए हैं। अल्जीरिया की सरकार ने यूएई पर अनुचित और शत्रुतापूर्ण गतिविधियों का आरोप लगाया है। आरोप है कि यूएई ने साहेल और उत्तरी अफ्रीका में सरकारों को अस्थिर करने का प्रयास किया, सत्तावादी नेताओं को वित्तीय सहायता दी, गृहयुद्ध और मानवसंहार को बढ़ावा दिया, और लाल सागर के आसपास व्यापारिक केंद्रों में अपने वित्तीय और सैन्य प्रभाव को बढ़ाया।
सऊदी अरब ने भी इस वर्ष यमन में एसटीसी जैसे संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच बढ़ती तनाव के कारण यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार ने यूएई से अपनी सेना को तुरंत वापस बुलाने की मांग की। हाल ही में इरिट्रिया के विदेश मंत्री ने एक साक्षात्कार में यूएई पर अफ्रीका में बंदरगाह साम्राज्यवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
सोमालिया ने भी इस साल जनवरी में यूएई के साथ सभी समझौतों को समाप्त कर दिया। उसने यूएई पर संप्रभुता, राष्ट्रीय एकता और राजनीतिक स्वतंत्रता को कमजोर करने का आरोप लगाया।
पिछले साल दिसंबर में इजरायल ने सोमालीलैंड को मान्यता दी, जिसे सोमालिया अपना हिस्सा मानता है। खुफिया रिपोर्ट के आधार पर, सोमालिया की सरकार ने यूएई पर इजरायल का समर्थन करने का आरोप लगाया और सभी समझौतों को समाप्त करने का निर्णय लिया।
सूडान के साथ भी यूएई के संबंध अच्छे नहीं हैं। यहां, यूएई अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) का समर्थन करता है, जिसके कारण सूडान की सरकार ने 2022 में यूएई के साथ एक महत्वपूर्ण बंदरगाह समझौता रद्द कर दिया। यह बंदरगाह लाल सागर पर 6 अरब डॉलर की लागत से बनने वाला था।
सूडान की सेना को सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की का समर्थन प्राप्त है, जबकि अर्धसैनिक बलों के साथ यूएई खड़ा है। लाल सागर के तट पर स्थित इरिट्रिया भी सूडान की सेना का समर्थन करता है। इरिट्रिया ने सूडान के सेना प्रमुख अब्देल फत्ताह अल-बुरहान को दो बार शरण दी है, जिससे यूएई के साथ उसके रिश्ते सामान्य नहीं रह गए हैं।
2016 में, यूएई ने इरिट्रिया को उसके दहलक द्वीप समूह में एक सैन्य अड्डा स्थापित करने का प्रस्ताव दिया, लेकिन इरिट्रिया ने इसे खारिज कर दिया क्योंकि इसमें इजरायल का भी शामिल होना था।
इरिट्रिया की सरकार इथियोपिया में यूएई और इजरायल के बढ़ते प्रभाव से चिंतित है, क्योंकि उसे इथियोपिया से स्वतंत्रता मिली थी। इथियोपिया लंबे समय से लाल सागर तक एक कॉरिडोर की मांग कर रहा है। सोमलीलैंड में यूएई और इजरायल के बढ़ते प्रभाव ने इरिट्रिया को और अधिक सतर्क कर दिया है, क्योंकि दोनों देशों की सीमाएं मिलती हैं।
अल्जीरिया और यूएई के बीच संबंध पहले अच्छे थे, लेकिन अब बिगड़ गए हैं। अल्जीरिया ने ब्रिक्स में शामिल होने की कोशिश की, लेकिन यूएई ने इसका विरोध किया। माली में यूएई की बढ़ती मौजूदगी ने अल्जीरिया की स्थिति को कमजोर किया, जिससे अल्जीरिया ने इसे अपनी सुरक्षा से जोड़ा।
माली में यूएई के दखल से अल्जीरिया नाराज है, और इसके राष्ट्रपति ने कहा था कि 'जहां भी संघर्ष होता है, इस राज्य (UAE) का पैसा वहां होता है, जैसे- माली, लीबिया और सूडान हो।'
लीबिया में, यूएई खलीफा हफ्तार का समर्थन करता है, जबकि तुर्की संयुक्त राष्ट्र मान्यता प्राप्त सरकार के पक्ष में है। आरोप है कि हफ्तार के माध्यम से यूएई लीबिया को सूडान सेना के खिलाफ एक बेस के रूप में इस्तेमाल करता है। लीबिया में उसके दखल से नाइजर, सूडान और चाड में हिंसा फैलाने के आरोप लगते हैं।
लाल सागर के तट पर जिबूती और यमन में भी यूएई के प्रति नकारात्मक भावना है। इस वर्ष, यूएई पर यमन के सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) को समर्थन देने का आरोप लगा। सऊदी अरब ने यूएई को जिम्मेदार ठहराया और यमन की सरकार ने यूएई से अपनी सेना को तुरंत वापस बुलाने की मांग की। एसटीसी यमन का एक अलगाववादी समूह है, जो दक्षिणी यमन को अलग करके एक नया देश बनाना चाहता है।
जिबूती के साथ भी यूएई के रिश्ते अच्छे नहीं हैं। 2012 में जिबूती की सरकार और यूएई की कंपनी डीपी वर्ल्ड ने डोरालेह बंदरगाह प्रबंधन से जुड़ा समझौता किया, लेकिन बाद में जिबूती ने इसे उपनिवेशवाद बताया और 2018 में 50 साल की रियायत को समाप्त कर दिया। यह बंदरगाह लाल सागर में बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के निकट स्थित है।
मिस्र, तंजानिया और सोमालीलैंड में यूएई की कंपनियों का भारी निवेश है। तंजानिया के दार-ए-सलाम और सोमालीलैंड के बेरबेरा बंदरगाह में इन कंपनियों की हिस्सेदारी है। इसके अलावा, यूएई की सेना भी इन क्षेत्रों में मौजूद है। इथियोपिया और यूएई के बीच मजबूत संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। सूडान के रैपिड सपोर्ट फोर्सेज को यूएई के कहने पर ही इथियोपिया में शरण मिलती है, और यहां से यूएई भारी मात्रा में हथियार और रसद भी आरएसएफ तक पहुंचाता है।