Donald Trump का नया व्यापार आदेश: विदेशी दवाओं पर 100% टैरिफ का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा कदम
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी ब्रांडेड दवाओं पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। यह कदम उन फार्मा कंपनियों पर प्रभाव डालेगा जो अपनी दवाएं अमेरिका के बाहर बनाती हैं। ट्रंप का स्पष्ट संदेश है कि कंपनियों को दवाओं की कीमतें कम करनी होंगी और उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करना होगा।
कंपनियों के लिए शर्तें
जो कंपनियां इन शर्तों का पालन नहीं करेंगी, उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। यदि कंपनियां कुछ उत्पादन अमेरिका में लाती हैं, तो उन्हें 20 प्रतिशत टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। सभी शर्तें पूरी करने पर टैरिफ में छूट मिल सकती है।
120 दिन का अल्टीमेटम
ट्रंप प्रशासन ने बड़ी फार्मा कंपनियों को नए नियम लागू करने के लिए 120 दिन का समय दिया है, जबकि छोटी कंपनियों को 180 दिन का समय दिया गया है। यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे व्यापारिक साझेदार देशों के लिए टैरिफ की दर 15 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ट्रंप का दावा है कि इससे दवाएं सस्ती होंगी और अमेरिका में नई नौकरियों का सृजन होगा।
मेटल्स पर राहत
ट्रंप ने स्टील, एल्युमिनियम और तांबे जैसे धातु उत्पादों पर भी टैरिफ नियमों में बदलाव किया है। पहले कई धातु उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ था, जिसे अब घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है। जिन उत्पादों में धातु की मात्रा 15 प्रतिशत से कम है, उन्हें टैरिफ से पूरी छूट दी गई है। यह कदम घरेलू उद्योगों को सस्ता कच्चा माल उपलब्ध कराने और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
पिछले फैसले की भरपाई
एक साल पहले ट्रंप ने 'लिबरेशन डे' के तहत भारी टैरिफ लगाए थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया था। इसके परिणामस्वरूप सरकार को 166 अरब डॉलर वापस करने पड़े। नए नियमों के माध्यम से इस नुकसान की भरपाई और अमेरिकी उद्योगों को संरक्षण देने का प्रयास किया जा रहा है।
व्यापार जगत की प्रतिक्रिया
स्टील उद्योग ने इस निर्णय का स्वागत किया है, उनका मानना है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। वहीं, फार्मा क्षेत्र और व्यापार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अचानक टैरिफ बढ़ने से दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ पड़ेगा।
यह निर्णय वैश्विक व्यापार में हलचल पैदा कर रहा है। अब देखना होगा कि विदेशी कंपनियां ट्रंप की शर्तों को स्वीकार करती हैं या अमेरिकी बाजार में नई चुनौतियों का सामना करती हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये कदम अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में सहायक होंगे।