×

Donald Trump की शांति डील पर उठे सवाल: G7 सम्मेलन में हुआ दिलचस्प पल

अमेरिका और ईरान के बीच चार महीने लंबे संघर्ष का अंत एक शांति समझौते के साथ हुआ है, लेकिन इसके बाद ट्रंप को राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। G7 सम्मेलन में एक पत्रकार ने ट्रंप को उनके 2020 के एक पुराने पोस्ट की याद दिलाई, जिससे स्थिति और भी दिलचस्प हो गई। जानिए इस समझौते पर क्या है विपक्ष का कहना और ट्रंप का क्या जवाब है।
 

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चार महीनों से चल रहे संघर्ष का अंत एक शांति समझौते के साथ हुआ है। हालांकि, इस महत्वपूर्ण युद्धविराम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपने देश में राजनीतिक आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला तब और बढ़ गया जब फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान एक पत्रकार ने ट्रंप को उनके 2020 के एक पुराने सोशल मीडिया पोस्ट की याद दिलाई।


G7 सम्मेलन में प्रेस कॉन्फ्रेंस का नजारा

लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी बहस


G7 समिट के दौरान एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में फॉक्स न्यूज के वरिष्ठ संवाददाता पीटर डूसू ने ट्रंप से समझौते की शर्तों पर सवाल उठाया। डूसू ने ट्रंप को याद दिलाया कि जनवरी 2020 में एक समझदार व्यक्ति ने कहा था कि ईरान कभी युद्ध नहीं जीतता, लेकिन बातचीत में भी हारता नहीं। इस पर ट्रंप ने पूछा, ऐसा किसने कहा था? डूसू ने तुरंत जवाब दिया, यह आपने ही कहा था।


समझौते पर उठे सवाल

समझौते की आलोचना


इस शांति समझौते को लेकर अमेरिका में विपक्षी सांसदों और विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने ईरान को जरूरत से ज्यादा रियायतें दी हैं और अमेरिका को कोई ठोस लाभ नहीं मिला है। ट्रंप ने कहा कि अगर वह तीन-चार हफ्ते और युद्ध जारी रखते, तो आलोचक कहते कि उन्होंने इसे बहुत लंबा खींच दिया। उन्होंने मीडिया और आलोचकों पर भी तीखा हमला किया, यह कहते हुए कि मीडिया उनके फैसलों को हमेशा गलत तरीके से पेश करेगा।


2020 का चर्चित पोस्ट

क्या था साल 2020 का वह चर्चित पोस्ट?


डोनाल्ड ट्रंप ने यह चर्चित बयान 3 जनवरी 2020 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया था। उस समय ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी के अमेरिकी हवाई हमले में मारे जाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। आज चार साल बाद, जब ट्रंप खुद ईरान के साथ शांति समझौते की मेज पर हैं, तो उनके पुराने शब्द उनके सामने चुनौती बनकर खड़े हैं।