Donald Trump ने Fort Hood गोलीबारी के आरोपी को दी मौत की सजा की मंजूरी
Fort Hood गोलीबारी मामले में महत्वपूर्ण निर्णय
नई दिल्ली: अमेरिका में 17 साल पहले हुए फोर्ट हूड गोलीबारी मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व मेजर निदाल मलिक हसन को दी गई मौत की सजा को स्वीकृति प्रदान की है। हसन पर 2009 में टेक्सास के फोर्ट हूड सैन्य अड्डे पर गोलीबारी करने का आरोप है, जिसमें 13 लोगों की जान गई थी और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। ट्रंप की स्वीकृति के बाद अब हसन को सैन्य न्याय व्यवस्था के तहत मौत की सजा देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अमेरिकी सेना में मृत्युदंड का उपयोग बहुत कम होता है, इसलिए इस निर्णय को विशेष माना जा रहा है।
गोलीबारी की घटना का विवरण
निदाल मलिक हसन उस समय अमेरिकी सेना में मनोचिकित्सक के रूप में कार्यरत था। 2009 में, वह फोर्ट हूड के एक मेडिकल सेंटर में पहुंचा, जहां सैनिकों की जांच चल रही थी। आरोप है कि उसने अचानक वहां गोलीबारी शुरू कर दी।
बताया गया है कि गोली चलाने से पहले हसन ने 'अल्लाहु अकबर' का नारा लगाया था। इस हमले में 13 लोगों की जान गई और 30 से अधिक लोग घायल हुए। यह घटना अमेरिका में एक बड़ा सदमा बन गई थी।
अफगानिस्तान युद्ध का संदर्भ
सुनवाई के दौरान, हसन ने अपने कार्य को इस आधार पर सही ठहराया कि वह अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान भेजे जाने और वहां मुसलमानों के खिलाफ युद्ध में शामिल होने से रोकना चाहता था। उसने अदालत में अपने बचाव के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप उसे सैन्य अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाई गई।
अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में मौत की सजा बहुत दुर्लभ है। आखिरी बार 1961 में प्राइवेट जॉन बेनेट को फांसी दी गई थी, जिसे 11 साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में मौत की सजा मिली थी। वर्तमान में, हसन समेत चार कैदी फोर्ट लीवनवर्थ की सैन्य मृत्युदंड सूची में हैं। ट्रंप की मंजूरी के बाद हसन के मामले में सजा लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन कानूनी चुनौतियों के कारण इसमें समय लग सकता है।