H-1B वीजा पर ट्रंप का नया फैसला: भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए बढ़ी चुनौतियाँ
अमेरिकी राष्ट्रपति का नया कदम
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार ऐसे निर्णय ले रहे हैं, जिनका वैश्विक प्रभाव पड़ रहा है, और इस बार उनका ध्यान भारत की ओर है। हाल ही में 100 प्रतिशत टैरिफ वाले कानून को मंजूरी देने के बाद, ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा से संबंधित एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। प्रशासन ने H-1B वीजा पर लगने वाले 1 लाख डॉलर के शुल्क को अगले एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है, जिसके खिलाफ अमेरिका की अदालत में मामला चल रहा है।
H-1B वीजा का महत्व
यह ध्यान देने योग्य है कि ट्रंप प्रशासन का यह आदेश पहले से ही सितंबर 2026 तक लागू था। H-1B वीजा के माध्यम से अमेरिकी कंपनियाँ विश्वभर से कुशल श्रमिकों को नियुक्त करती हैं, विशेषकर आईटी क्षेत्र में। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई कंपनियाँ विदेशी कर्मचारियों को कम वेतन पर नियुक्त करती हैं, जिससे अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार की समस्या उत्पन्न होती है।
शुल्क का भुगतान करने वाले
700 से अधिक लोगों ने भरा शुल्क
जानकारी के अनुसार, 21 सितंबर 2025 को लागू होने के बाद से अब तक 700 से अधिक व्यक्तियों ने यह शुल्क चुका दिया है। इस बीच, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने H-1B वीजा की चयन प्रक्रिया में भी बदलाव की घोषणा की है। आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों ने H-1B रजिस्ट्रेशन की संख्या 24,946 से घटाकर केवल 2,055 कर दी है, जो लगभग 92 प्रतिशत की कमी है।
भारतीयों के लिए चिंता का विषय
भारतीय पेशेवरों पर प्रभाव
कई भारतीय पेशेवर H-1B वीजा के माध्यम से अमेरिका में कार्यरत होते हैं। USCIS के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में अमेरिका में जारी कुल H-1B वीजा में से 71 प्रतिशत भारतीयों को मिले, जबकि चीन के नागरिकों की हिस्सेदारी केवल 12 प्रतिशत थी। यह वीजा भारतीयों के लिए अमेरिका में काम करने का सबसे बड़ा साधन रहा है, लेकिन 1 लाख डॉलर का शुल्क हर किसी के लिए वहन करना आसान नहीं होगा।
अदालत में मामला
2025 में लागू किए गए इस 1 लाख डॉलर के शुल्क को अदालत में चुनौती दी जा चुकी है और यह मामला वर्तमान में दो अलग-अलग संघीय अदालतों में विचाराधीन है। इस महीने 2025 के आदेश की अवधि समाप्त होने वाली थी, लेकिन अब इसे एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया है। हालांकि, यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं, और यह मौजूदा वीजा के नवीनीकरण पर भी लागू नहीं होता।
आवेदन प्रक्रिया में सख्ती
सख्त जांच प्रक्रिया
इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसके तहत विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाकर H-1B वीजा आवेदनों की जांच को और सख्त किया जाएगा। आदेश में विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि क्या आवेदन करने वाली कंपनी ने हाल ही में उसी पद पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की है या ऐसा करने की योजना बना रही है। ट्रंप ने अपने कार्यकारी आदेश में कहा कि H-1B वीजा कार्यक्रम की शुरुआत विशेष रूप से कुशल विदेशी श्रमिकों की पहचान करने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए की गई थी। लेकिन उनका आरोप है कि कुछ कंपनियों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों ने इस कार्यक्रम का दुरुपयोग किया है, जिससे अमेरिकी कुशल कर्मचारियों को कम वेतन पर नौकरी से निकाला जा रहा है।