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IAEA की चेतावनी: वेस्ट एशिया में सैन्य हमलों से न्यूक्लियर सुरक्षा पर खतरा

IAEA के निदेशक रफाएल ग्रॉसी ने वेस्ट एशिया में चल रहे सैन्य संघर्षों के कारण न्यूक्लियर सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि रेडियोलॉजिकल रिलीज की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, जिससे बड़े शहरों के आसपास के क्षेत्रों को खाली करने की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर अभी तक कोई नुकसान नहीं हुआ है। जानें इस स्थिति के बारे में और अधिक जानकारी।
 

IAEA की चिंता और स्थिति का आकलन


नई दिल्ली: 2 मार्च 2026 को, IAEA के निदेशक रफाएल ग्रॉसी ने बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की बैठक में बताया कि वेस्ट एशिया में चल रहे सैन्य संघर्षों के कारण न्यूक्लियर सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि रेडियोलॉजिकल रिलीज की संभावना को नकारा नहीं किया जा सकता, जिससे बड़े शहरों के आसपास के क्षेत्रों को खाली करने की आवश्यकता हो सकती है। स्थिति अत्यंत चिंताजनक है।


हालांकि, IAEA ने यह स्पष्ट किया है कि ईरान की किसी भी न्यूक्लियर साइट पर अभी तक कोई नुकसान या रेडिएशन लीक नहीं हुआ है। पड़ोसी देशों में बैकग्राउंड रेडिएशन सामान्य स्तर पर है और कोई वृद्धि नहीं देखी गई है। IAEA ईरान के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।


मुख्य न्यूक्लियर साइट्स और संभावित खतरे

ईरान की प्रमुख न्यूक्लियर साइट्स में बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट, तेहरान रिसर्च रिएक्टर, नतांज, फोर्डो और इस्फहान शामिल हैं। इनमें यूरेनियम संवर्धन और ईंधन भंडारण की गतिविधियाँ होती हैं। यदि इन पर हमला होता है, तो खतरा बढ़ सकता है। सेंट्रीफ्यूज के टूटने से जहरीली UF6 गैस का रिसाव हो सकता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।


हालांकि, हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का फैलाव हो सकता है, लेकिन चेर्नोबिल जैसी बड़ी घटना की संभावना कम है क्योंकि कोई बड़ा रिएक्टर सक्रिय नहीं है। बुशहर जैसे पावर प्लांट पर हमले के परिणामस्वरूप रेडिएशन का फैलाव हो सकता है। वर्तमान में, IAEA के अनुसार इन साइट्स पर किसी हमले या नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। खतरा केवल संभावित है, वास्तविकता में कोई रेडिएशन नहीं निकला है।


US-इजरायल हमलों का प्रभाव

28 फरवरी 2026 से ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (US) और रोअरिंग लायन (इजरायल) के तहत ईरान पर बड़े हमले किए गए। इन हमलों में सैन्य लक्ष्यों, मिसाइल स्थलों, कमांड सेंटरों और कुछ न्यूक्लियर से जुड़े क्षेत्रों को निशाना बनाया गया। ईरान ने नतांज पर हमले का दावा किया, लेकिन IAEA ने इसकी पुष्टि नहीं की। ग्रॉसी ने कहा कि अब तक किसी न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन को सीधा नुकसान नहीं पहुंचा है।


पिछले हमलों में नतांज और इस्फहान को नुकसान हुआ था, लेकिन रेडिएशन का रिसाव नहीं हुआ। इन हमलों ने सुरक्षा के खतरे को बढ़ा दिया है क्योंकि भविष्य में और हमले हो सकते हैं। वर्तमान में कोई रेडिएशन लीक नहीं हुआ है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। खतरा केवल स्थानीय स्तर पर हो सकता है, पूरे देश या क्षेत्र में फैलने की संभावना कम है। IAEA ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीति को आगे बढ़ाने की अपील की है।