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इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता: मीनाब हमले की यादें ताजा

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर चर्चा के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है। इस बैठक में मीनाब हमले की यादें ताजा हो गई हैं, जिसमें 165 से अधिक बच्चियों की जान गई थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भावुक तस्वीरों के माध्यम से यह संदेश दिया है कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन हमले का दर्द अभी भी उनके दिलों में जीवित है। जानें इस वार्ता के प्रमुख बिंदु और ईरान की भावनाएं।
 

अमेरिका और ईरान के बीच महत्वपूर्ण बैठक

आज इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। दोनों पक्ष युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत करेंगे। अमेरिका का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे, जबकि ईरान की ओर से संसद के अध्यक्ष मोहम्मद गालिबफ बैठक में शामिल होंगे। ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने मीनाब हमले की घटनाओं को फिर से याद किया है, जिसमें मारी गई बच्चियों को नहीं भुलाने का संकेत दिया है।


ईरान का भावुक संदेश

ईरान ने अपने प्रतिनिधिमंडल की उड़ान की एक तस्वीर साझा की है, जिसने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इस तस्वीर में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए मासूम लड़कियों के लिए सीटें खाली रखी गई हैं, और ईरानी नेता उन्हें देख रहे हैं।


खून से सने बैग और जूते

जब ईरानी संसद के स्पीकर इस्लामाबाद पहुंचे, तो उसी उड़ान में अमेरिका और इजरायल के हमलों में मारे गए बच्चों के लिए भी जगह रखी गई। सीटों पर उन बच्चों की तस्वीरें लगाई गई हैं, जिनकी जानें गईं। इन तस्वीरों के साथ खून से सने स्कूल बैग और जूते भी रखे गए हैं।


हमले का दर्द और वार्ता

ईरान के नेता इन भावनात्मक तस्वीरों को देख रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि वे शांति वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन हमले में मारे गए बच्चों का दर्द अभी भी उनके दिलों में जीवित है।


मीनाब हमले की भयावहता

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया, जिसमें मीनाब शहर के एक गर्ल्स स्कूल को निशाना बनाया गया। इस हमले में 165 से अधिक बच्चियों की जान गई। इस घटना के बाद दुनिया भर में इसकी निंदा की गई।


अमेरिका पर आरोप

ईरान ने इस हमले के लिए अमेरिका और पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया, जबकि ट्रंप ने ईरान को दोषी ठहराया। अमेरिका का कहना है कि उनका निशाना स्कूल नहीं, बल्कि सैन्य ठिकाने थे। ईरान ने इस हमले का प्रतिशोध लेने की बात की है।