ईरान ने युद्ध के बीच दो विपक्षी सदस्यों को दी फांसी
ईरान में फांसी की घटनाएं
ईरान ने शनिवार को अमेरिका-इजरायल संघर्ष के बीच दो व्यक्तियों को फांसी की सजा दी है। ये दोनों लोग पीपुल्स मोजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान से जुड़े हुए थे, जिस पर ईरानी सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। सर्वोच्च अदालत ने इन दोनों को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने का दोषी पाया। अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद, शनिवार की सुबह उन्हें फांसी पर लटका दिया गया।
सरकार की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया
पीपुल्स मोजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन ऑफ ईरान ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि ईरानी सरकार ने विद्रोहियों को रोकने के प्रयास में वाहिद बानी अमेरियन और अबुलहसन मोंटाजर को फांसी दी है। संगठन ने यह भी कहा कि मौलवी शासन असंतुष्टों के खिलाफ राज्य समर्थित आतंक के अपने अभियान को तेज कर रहा है।
अन्य फांसी की घटनाएं
ईरान ने 30 और 31 मार्च को चार अन्य व्यक्तियों को भी फांसी दी थी। इनकी पहचान मोहम्मद तगवी, अकबर दानेशवरकर, बावक अलीपुर और पौया घोबादी के रूप में हुई थी। सभी लोग पीपुल्स मोजाहिदीन ऑर्गनाइजेशन के सदस्य थे। संगठन का कहना है कि इन सभी को 2024 के अंत में गिरफ्तार किया गया था और एक रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया।
फांसी पर चढ़ाए गए व्यक्तियों की जानकारी
66 वर्षीय अबुलहसन मोंटाजर एक वास्तुकार थे और 1980 के दशक में राजनीतिक कैदी भी रहे। 33 वर्षीय वाहिद बानी अमेरियन ने प्रबंधन में डिग्री प्राप्त की थी और 2017 में आजादी की मांग करने पर उन्हें चार साल जेल में बिताने पड़े थे। दोनों को 2024 में गिरफ्तार किया गया और ईरान की कुख्यात एविन जेल में रखा गया, जहां उन पर गंभीर शारीरिक और मानसिक यातनाएं दी गईं।
सुप्रीम कोर्ट से भी झटका
तेहरान की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने दोनों को मौत की सजा सुनाई थी। पिछले साल 16 नवंबर को उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी गई थी, और दिसंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने भी सजा को बरकरार रखा। इसके बाद एक हफ्ते के भीतर छह लोगों को फांसी की सजा दी गई।
युद्ध के बीच फांसी की बढ़ती घटनाएं
अमेरिका-इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने कई लोगों को फांसी की सजा सुनाई है। 19 मार्च को चार व्यक्तियों को फांसी दी गई थी, जिनमें सालेह मोहम्मदी, मेहदी गसेमी और सईद दाऊदी शामिल थे। इससे पहले 18 मार्च को कुरुश कीवानी को जासूसी के आरोप में फांसी दी गई थी। एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि आने वाले समय में पांच युवा प्रदर्शनकारियों को भी फांसी दी जा सकती है।