कनाडा में स्थायी निवास आवेदन प्रक्रिया बंद, भारतीय परिवारों में चिंता
कनाडा सरकार का नया निर्णय
भारत से कनाडा जाने वाले हजारों युवाओं और उनके परिवारों को एक बार फिर से निराशा का सामना करना पड़ा है। कनाडा सरकार ने पैरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम (PGP) के तहत नए स्थायी निवास (पीआर) आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया है। यह निर्णय 15 जुलाई से लागू हुआ है, जिससे भारतीय परिवारों की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यह कार्यक्रम लंबे समय से माता-पिता और दादा-दादी को कनाडा में स्थायी रूप से बसाने का एक सरल तरीका था। इस प्रोग्राम के तहत लगभग 80,000 लोगों ने आवेदन किया है, और कनाडा सरकार के इस निर्णय का प्रभाव इन्हीं आवेदकों पर अधिक पड़ेगा।
पैरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम का इतिहास
कनाडा सरकार ने 2020 में पैरेंट्स एंड ग्रैंडपेरेंट्स प्रोग्राम की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य कनाडा में निवास कर रहे नागरिकों और स्थायी निवासियों को अपने माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी रूप से अपने साथ लाने का अवसर प्रदान करना था। इस प्रोग्राम के माध्यम से परिवारों को एकजुट रखने पर जोर दिया गया। भारत से कई युवा पढ़ाई और रोजगार की तलाश में कनाडा जाते हैं, और उनके परिवारों ने इस योजना के तहत पीआर के लिए आवेदन किया था। लेकिन अब नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि यह प्रोग्राम कब फिर से शुरू होगा या लंबित मामलों का समाधान कब होगा।
लंबित आवेदनों की संख्या
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस योजना के आरंभ होने के बाद हजारों लोगों ने पीआर के लिए आवेदन किया था। वर्तमान में लगभग 80,000 आवेदन लंबित हैं, जिससे कई परिवार अपने माता-पिता और दादा-दादी के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कई परिवार वर्षों से आवेदन की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। अब जब यह प्रोग्राम बंद हो गया है, तो इन लंबित आवेदनों के निपटारे को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, सरकार ने इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी है।
भारतीय समुदाय पर प्रभाव
कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग निवास करते हैं। पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों के युवा बड़ी संख्या में कनाडा जाते हैं और बाद में वहीं स्थायी निवास प्राप्त करते हैं। इनमें से कई युवा अपने बुजुर्ग माता-पिता को स्थायी रूप से अपने पास लाने के लिए इस प्रोग्राम पर निर्भर थे। भारतीय समुदाय का मानना है कि यह केवल इमिग्रेशन का मामला नहीं है, बल्कि परिवारों को एक साथ रखने का विषय भी है। कई परिवारों का कहना है कि बुजुर्ग माता-पिता भारत में अकेले रह रहे हैं और स्थायी निवास मिलने पर उन्हें बेहतर पारिवारिक सहयोग और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती थीं।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
कनाडा सरकार हाल के समय में इमिग्रेशन के नियमों को सख्त कर रही है। हालांकि, सरकार ने इस निर्णय के पीछे की रणनीति साझा नहीं की है। इमिग्रेशन मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इमिग्रेशन नियमों में बदलाव कर रही है और सार्वजनिक खर्च तथा स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को ध्यान में रख रही है। उनका मानना है कि सरकार नए स्थायी निवास आवेदनों को सीमित करने की नीति पर काम कर रही है।
सुपर वीजा का विकल्प
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि सुपर वीजा व्यवस्था अभी भी जारी है, लेकिन इसे स्थायी निवास का विकल्प नहीं माना जा सकता। सुपर वीजा के माध्यम से माता-पिता लंबे समय तक कनाडा में रह सकते हैं, लेकिन उन्हें स्थायी निवासी का दर्जा और उससे जुड़े सभी अधिकार नहीं मिलते हैं। जानकारों का मानना है कि सरकार इस वीजा को बढ़ावा दे सकती है।
बुजुर्गों के स्वास्थ्य खर्च
रिपोर्टों के अनुसार, कई परिवारों का मानना है कि सुपर वीजा पर आने वाले बुजुर्गों को सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिलता। गंभीर बीमारी की स्थिति में इलाज का खर्च काफी बढ़ सकता है। ऐसे में स्थायी निवास को अधिक सुरक्षित विकल्प माना जाता रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि सरकार भी इस बढ़ते खर्च को लेकर चिंतित है।
पिछले बदलाव
कनाडा में माता-पिता और दादा-दादी को स्थायी निवास देने की प्रक्रिया पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। 2000 से 2011 तक आवेदन प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल थी, लेकिन भारी संख्या में लंबित मामलों के कारण 2011 में पुरानी व्यवस्था बंद कर दी गई। इसके बाद लॉटरी सिस्टम और सुपर वीजा जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। हालांकि, इन व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठते रहे। 2020 में नया पायलट प्रोग्राम शुरू किया गया, जिसमें दो लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद भी लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ती रही। अब कनाडा सरकार ने यह प्रोजेक्ट भी बंद कर दिया है। वर्तमान में नए आवेदन स्वीकार नहीं किए जा रहे हैं। लंबित आवेदनों की प्रक्रिया जारी रहेगी या नहीं, इस पर सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है।