ट्रंप और जर्मन चांसलर के बीच बढ़ते मतभेद: सैनिकों की वापसी पर विचार
ट्रंप और मर्त्स के बीच तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्स के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। हाल ही में ट्रंप ने मर्त्स की सार्वजनिक रूप से आलोचना की और उन्हें अपने देश के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। 27 अप्रैल को मर्त्स द्वारा दिए गए एक बयान ने ट्रंप को नाराज कर दिया, जिसके बाद से दोनों नेताओं के बीच तनाव बढ़ गया है। हालांकि, मर्त्स ने ट्रंप के प्रति संयमित रुख अपनाया है। जब उनसे ट्रंप के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, 'मेरे और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच व्यक्तिगत संबंध पहले की तरह अच्छे हैं।'
ट्रंप की आलोचना और जर्मनी की स्थिति
डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने देश की समस्याओं को सुलझाने और रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मर्त्स को ईरान में हस्तक्षेप पर कम ध्यान देना चाहिए। इस बीच, जर्मनी के अधिकारी ट्रंप के साथ विवाद को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन जर्मनी से अमेरिकी सैनिकों की वापसी पर विचार कर रहा है।
ईरान के मुद्दे पर ट्रंप का गुस्सा
ट्रंप ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से ईरान के खिलाफ समर्थन मांगा था, लेकिन किसी ने भी उनका साथ नहीं दिया, जिससे वह नाराज हैं। अब वह यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती को कम करने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह स्पेन और इटली से भी सैनिकों को वापस बुलाने पर विचार कर रहे हैं।
जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की संख्या
जर्मनी में वर्तमान में 36,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में अमेरिकी सेना की सबसे बड़ी तैनाती है। ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका जर्मनी में सैनिकों की संभावित कटौती का अध्ययन कर रहा है और इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
मर्त्स का विवादास्पद बयान
27 अप्रैल को छात्रों के साथ बातचीत में, मर्त्स ने कहा कि ईरान का नेतृत्व अमेरिका को अपमानित कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईरानी बातचीत में कुशल हैं, लेकिन अमेरिका को बिना किसी नतीजे के वापस भेज देते हैं।
ट्रंप का गुस्सा और प्रतिक्रिया
मर्त्स के बयान ने ट्रंप को नाराज कर दिया। 28 अप्रैल को, ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर जर्मनी और मर्त्स की आलोचना की, यह कहते हुए कि मर्त्स को ईरान के न्यूक्लियर हथियारों के बारे में समझ नहीं है। उन्होंने जर्मनी की आर्थिक स्थिति पर भी सवाल उठाए।