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पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने ईरान-सऊदी अरब के बीच गुप्त समझौता कराया

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त समझौता स्थापित किया है, जिसमें अवैध ईरानी तेल निर्यात का लालच दिया गया। यह समझौता अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद हुआ और इसके परिणामस्वरूप सऊदी अरब को तेहरान से कम खतरा झेलना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि दोनों जनरलों ने इस डील से भारी मुनाफा कमाया है। जानें इस समझौते के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने ईरान और सऊदी अरब के बीच एक गुप्त समझौता स्थापित किया है। इस समझौते के बदले में, मुनीर ने पाकिस्तान के माध्यम से अवैध रूप से ईरानी तेल के निर्यात का प्रस्ताव दिया। यह जानकारी टाइम्स ऑफ इजरायल द्वारा एक खुफिया अधिकारी, एक राजनयिक और एक अन्य जानकार के हवाले से सामने आई है।


समझौते का समय और प्रभाव

रिपोर्ट के अनुसार, यह समझौता अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के कुछ दिनों बाद मार्च में हुआ। इसके परिणामस्वरूप, सऊदी अरब को तेहरान से अपेक्षाकृत कम खतरा झेलना पड़ा।


लालच के बदले डील

आसिम मुनीर ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख अहमद वाहिदी से मुलाकात की और उन्हें एक संयुक्त तेल परिवहन परियोजना का लालच दिया। इसके तहत, ईरान पिछले साल के अंत से गुप्त रूप से पाकिस्तान में अपना तेल पहुंचा रहा है। इसके बदले में, आईआरजीसी ने सऊदी अरब पर हमले से बचने पर सहमति जताई। समझौते के बाद, सऊदी अरब की सुरक्षा में काफी सुधार हुआ।


जनरलों से जुड़ी कंपनियों का मुनाफा

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आसिम मुनीर और अहमद वाहिदी की कंपनियां अवैध तेल तस्करी के माध्यम से भारी मुनाफा कमा रही हैं। यह सब फारस की खाड़ी में चल रही अमेरिकी नाकेबंदी के बीच हो रहा है। मुनीर ने ईरान को अमेरिकी नाकेबंदी को दरकिनार करने का विकल्प दिया और मुनाफा कमाने का अवसर भी प्रदान किया।


हमलों पर रोक

रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन महीने से अधिक समय तक ईरान ने सऊदी अरब पर कोई हमला नहीं किया। हालांकि, पिछले सप्ताह तेहरान ने एक मिसाइल दागी थी। एक राजनयिक ने बताया कि हमले के बाद, मुनीर ने वाहिदी से बात की और कहा कि यह हमले उनके संयुक्त उद्यम को खतरे में डाल सकते हैं। इसके बाद, सऊदी अरब पर कोई और मिसाइल हमला नहीं हुआ।


ईरान की मांगें

ईरान ने युद्ध से बचने के लिए खाड़ी देशों से भारी रकम मांगी थी और अमेरिका से भी नुकसान की भरपाई की मांग की थी। एक राजनयिक ने मुनीर के गुप्त समझौते की आलोचना की और कहा कि यह समझौता ईरान के फिरौती मांगने को वैध ठहराता है।