PM मोदी और नेतन्याहू के बीच फोन वार्ता: भारत-इजरायल संबंधों पर चर्चा
नई दिल्ली में पीएम मोदी का नेतन्याहू से संवाद
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 अगस्त, गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं और भारत-इजरायल के द्विपक्षीय संबंधों पर गहन चर्चा की।
भारत-इजरायल की रणनीतिक साझेदारी पर जोर
PMO ने बताया कि नेतन्याहू और मोदी ने भारत-इजरायल की विशेष रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा की। दोनों देशों ने रक्षा, प्रौद्योगिकी और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया।
बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि नेतन्याहू और मोदी पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार संपर्क में रहेंगे। इस क्षेत्र में पिछले पांच महीनों से टकराव जारी है और इसका कोई स्थायी समाधान अभी तक नहीं निकला है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
इस बीच, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर गतिविधियाँ बढ़ रही हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ओमान के साथ एक समझौते का मसौदा अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक निर्देशांकों पर सहमति बन गई है। यदि कोई तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं करता है, तो जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी किया जा सकता है।
बघाई ने आरोप लगाया कि होर्मुज को असुरक्षित बनाने वाले कारक अमेरिका की ओर से हैं, विशेषकर नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान के खिलाफ धमकी भरे कदम।
होर्मुज जलमार्ग वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। फरवरी में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों से पहले, लगभग 20% तेल और गैस का शिपमेंट इसी मार्ग से होता था।
क्या यह डील तनाव को कम करेगी?
AP की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान-ईरान डील के मसौदे को ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मंजूरी की आवश्यकता होगी। अधिकारियों ने इसे होर्मुज विवाद का अस्थायी समाधान बताया है।
संभावित समझौते के तहत, जहाज ईरान के नियंत्रित मार्ग से फारस की खाड़ी में प्रवेश करेंगे और ओमान के रास्ते बाहर निकलेंगे। सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण के लिए सेवा शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका इसका विरोध कर रहा है।
अमेरिका का कहना है कि ईरान का शुल्क लेना इस समझौते के खिलाफ है और होर्मुज सभी जहाजों के लिए खुला रहना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह डील सफल होती है, तो इससे अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत शुरू करने का रास्ता खुल सकता है। जून में हुआ पिछला समझौता हमलों के बाद टूट गया था।