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PoJK में इंटरनेट सेवाओं की बहाली की मांग, मानवाधिकार परिषद ने उठाई आवाज़

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार परिषद ने इंटरनेट सेवाओं की तत्काल बहाली की मांग की है। परिषद का कहना है कि लंबे समय से इंटरनेट बंद रहने से लोगों के बुनियादी अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे छात्रों और व्यवसायियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, परिषद ने एक छात्र की आत्महत्या के मामले में जांच की पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है।
 

इंटरनेट सेवाओं की बहाली की आवश्यकता

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) की मानवाधिकार परिषद ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को तुरंत पुनर्स्थापित करने की अपील की है। परिषद का कहना है कि लंबे समय से इंटरनेट बंद रहने के कारण लोगों के मूलभूत अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे छात्रों, फ्रीलांसरों, व्यवसायियों और विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, PoJK की मानवाधिकार परिषद ने बताया कि इंटरनेट में लगातार रुकावट से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, जानकारी प्राप्त करने और संवाद करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। परिषद के अनुसार, विश्वसनीय इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी के कारण छात्रों, फ्रीलांसरों और व्यवसायियों को गंभीर समस्याओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। विदेशों में रहने वाले कश्मीरियों को भी अपने परिवारों और समुदायों से संपर्क बनाए रखने में कठिनाई हो रही है。


डिजिटल एक्सेस की महत्ता

परिषद ने स्पष्ट किया कि डिजिटल एक्सेस अब केवल एक सुविधा नहीं रह गई है, बल्कि यह रोजगार, शिक्षा, संवाद और बुनियादी मानवाधिकारों के उपयोग और सुरक्षा का एक आवश्यक साधन बन गया है।


आत्महत्या मामले पर चिंता

इसलिए, परिषद ने मांग की है कि PoJK में इंटरनेट सेवाओं को बिना किसी और देरी के पूरी तरह बहाल किया जाए। एक अलग पोस्ट में, मानवाधिकार परिषद ने अगस्त 2023 में मुज़फ़्फ़राबाद के बाहरी इलाके में एक प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में एक छात्र की कथित आत्महत्या के मामले को संभालने के तरीके पर भी चिंता व्यक्त की।


जांच की पारदर्शिता की आवश्यकता

काउंसिल के अनुसार, उन्हें छात्र की मौत के बारे में एक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद शिक्षा विभाग ने घटना से जुड़े हालात की जांच के लिए एक जांच समिति का गठन किया। हालांकि, काउंसिल का आरोप है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है और न ही जिम्मेदारी तय करने या एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी दी गई है। मानवाधिकार परिषद ने शिक्षा विभाग से कहा कि वह जांच समिति की रिपोर्ट, मुख्य निष्कर्ष, आवश्यक तथ्य और अब तक की गई कार्रवाई को सार्वजनिक करे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करे कि मृतक छात्र और उनके परिवार की गोपनीयता और गरिमा बनी रहे।


जांच में देरी पर स्पष्टीकरण

काउंसिल ने आगे कहा कि यदि जांच अधूरी रहती है, तो शिक्षा विभाग को देरी का कारण बताना चाहिए और रिपोर्ट जारी करने के लिए एक स्पष्ट समय-सीमा प्रदान करनी चाहिए। काउंसिल के अनुसार, किसी छात्र की मौत को केवल एक प्रशासनिक मामला नहीं माना जा सकता, और उसने घटना से जुड़े हालात की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की। उसने इस बात पर भी जोर दिया कि एजुकेशनल इंस्टिट्यूट में जवाबदेही तय करना और सुरक्षित माहौल प्रदान करना राज्य की जिम्मेदारी है।