PSLV-C62 मिशन की असफलता के बावजूद KID कैप्सूल ने किया कमाल, जानें कैसे
इसरो के मिशन में आया बड़ा मोड़
नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पीएसएलवी-सी62 मिशन की असफलता ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक नया मोड़ ला दिया है। इस मिशन के दौरान मुख्य पेलोड को नुकसान हुआ, लेकिन स्पेन की निजी कंपनी ऑर्बिटल पैराडाइम ने यह दावा किया है कि उसका प्रायोगिक कैप्सूल केस्ट्रेल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर (KID) सुरक्षित रहा।
KID कैप्सूल की सफलता
ऑर्बिटल पैराडाइम के अनुसार, यह कैप्सूल लगभग 25 किलोग्राम वजनी और फुटबॉल के आकार का है, जिसे 12 जनवरी को पीएसएलवी-सी62 मिशन में सह-यात्री के रूप में लॉन्च किया गया था। मिशन के तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के बावजूद, KID कैप्सूल रॉकेट के चौथे चरण से सफलतापूर्वक अलग होने में सफल रहा। कंपनी ने बताया कि कैप्सूल ने तीन मिनट से अधिक समय तक पृथ्वी पर डेटा भेजा, जो इस तरह की परिस्थितियों में असाधारण है।
चरम परिस्थितियों का सामना
ऑर्बिटल पैराडाइम ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि KID कैप्सूल ने अत्यधिक प्रतिकूल पुनः प्रवेश स्थितियों का सामना किया। इस दौरान कैप्सूल ने लगभग 28g तक की जी-फोर्स और उच्च तापमान को सहन किया, जो आमतौर पर प्रायोगिक उपकरणों को नष्ट कर देता है। कंपनी के अनुसार, कैप्सूल के आंतरिक तापमान और अन्य महत्वपूर्ण डेटा सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड किए गए हैं, जिनका विश्लेषण जारी है।
पीएसएलवी-सी62 मिशन की विफलता
इसरो का यह मिशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 10:17 बजे प्रक्षिप्त किया गया था। इसमें डीआरडीओ का रणनीतिक इमेजिंग उपग्रह EOS-N1 (अन्वेषा), आयुलसैट समेत कुल 16 उपग्रह शामिल थे, जिनमें मॉरीशस, नेपाल और अन्य देशों के अंतरराष्ट्रीय पेलोड भी थे। हालांकि, तीसरे चरण (PS3) के अंतिम बर्न के दौरान आई विसंगति के कारण उपग्रहों को कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने तीसरे चरण में 'विचलन' की पुष्टि की है और मामले की जांच जारी है।
निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए मील का पत्थर
KID कैप्सूल का इस तरह बच जाना निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। फ्रांस की कंपनी RIDE के सहयोग से विकसित यह तकनीक भविष्य में पुनः प्रयोज्य रि-एंट्री सिस्टम, उपग्रह सर्विसिंग और डी-ऑर्बिटिंग मिशनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित पुनः प्रवेश के दौरान मिला यह डेटा अगली पीढ़ी की अंतरिक्ष तकनीक के विकास में तेजी लाएगा।
इसरो की नई चुनौतियाँ
जहां यह घटना भारतीय राइडशेयर मिशनों पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है, वहीं इसरो के लिए पीएसएलवी-सी62 की विफलता की जांच प्राथमिकता बनी हुई है, खासकर गगनयान और चंद्रयान-4 जैसे महत्वाकांक्षी अभियानों से पहले।