अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा विवाद: क्या फिर से बढ़ेगा तनाव?
सीमा विवाद की नई लहर
नई दिल्ली: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गंभीर रूप ले चुका है। हाल की घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों में तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका बढ़ गई है। सीमा पार हमलों के आरोपों के बीच आम नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
हमलों के बाद की स्थिति
सोमवार को हुए हमलों के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है। अफगानिस्तान के अनुसार, इन हमलों में चार लोगों की जान गई है और 70 लोग घायल हुए हैं, जिनमें 30 छात्र भी शामिल हैं। इस घटना ने न केवल मानवीय चिंता को बढ़ाया है बल्कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को भी बढ़ा दिया है।
आरोप-प्रत्यारोप का दौर
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर हमले का सीधा आरोप लगाया है। अफगान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तानी सैन्य शासन ने कुनार प्रांत के असदाबाद और मनवर जिले में भारी बमबारी की है।" वहीं, पाकिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से सटीक और खुफिया जानकारी पर आधारित होती है।
कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी
घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी आई है। मंगलवार को अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल में पाकिस्तानी दूतावास के शार्जे डी'अफेयर्स को तलब किया और हमलों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।
सीमा पर नई कार्रवाई
मंगलवार को पाकिस्तान ने बलूचिस्तान से सटी सीमा पर अफगान सुरक्षा चौकियों को नष्ट करने का दावा किया। 'रेडियो पाकिस्तान' के अनुसार, यह कार्रवाई सीमा सुरक्षा के तहत की गई।
आतंकवाद और घुसपैठ का मुद्दा
दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का मुख्य कारण आतंकवाद और सीमा पार घुसपैठ है। पाकिस्तान ने बार-बार काबुल की तालिबान सरकार से मांग की है कि वह अपनी जमीन पर सक्रिय चरमपंथी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करे। हालांकि, अफगानिस्तान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।
चीन की मध्यस्थता का प्रभाव
इस तनाव से एक महीने पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम पर सहमति बनी थी, जिसमें चीन ने मध्यस्थता की थी। लेकिन हाल की घटनाओं ने इस शांति प्रक्रिया को खतरे में डाल दिया है, जिससे क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीद कमजोर होती दिख रही है।