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अफगानिस्तान में 5.3 तीव्रता का भूकंप, कोई हताहत नहीं

गुरुवार की सुबह अफगानिस्तान के हिंदू कुश क्षेत्र में 5.3 की तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र काबुल से 165 किलोमीटर दूर था और राहत की बात यह है कि भूकंप की गहराई 126 किलोमीटर थी, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। भूकंप के बाद अब तक किसी भी हताहत या नुकसान की सूचना नहीं मिली है। इस क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता और भारतीय तथा यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव के कारण यहां भूकंप की घटनाएं आम हैं।
 

अफगानिस्तान में भूकंप की घटना

गुरुवार की सुबह, जब अधिकांश लोग सो रहे थे, अफगानिस्तान में एक गंभीर भूकंप आया। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप 6:59:20 बजे (IST) हिंदू कुश क्षेत्र में 5.3 की तीव्रता के साथ महसूस किया गया। इसका केंद्र काबुल से लगभग 165 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में, 35.981 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 68.700 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। राहत की बात यह है कि भूकंप की गहराई 126 किलोमीटर थी, जिससे सतह पर व्यापक नुकसान होने से बचा गया।


भूकंप की जानकारी और प्रभाव

NCS द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भूकंप की गहराई 126 किलोमीटर थी और इसका केंद्र अफगानिस्तान में था। एजेंसी ने कहा, "भूकंप की तीव्रता: 5.3, समय: 01/10/2026 06:59:20 IST, अक्षांश: 35.981 N, देशांतर: 68.700 E, गहराई: 126 किमी।" अब तक किसी भी प्रकार के नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। हालांकि, यह जानने के लिए कि क्या भूकंप ने किसी क्षेत्र में प्रभाव डाला है, अफगान अधिकारियों से और जानकारी की आवश्यकता होगी।


हिंदू कुश क्षेत्र की भूकंपीय संवेदनशीलता

हिंदू कुश क्षेत्र, जो अफगानिस्तान और पाकिस्तान के आसपास स्थित है, भूकंप के लिए अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यहाँ विभिन्न गहराई पर भूकंप आते रहते हैं, जिनमें कम गहराई वाले झटके भी शामिल हैं। इस क्षेत्र की जटिल भू-संरचना भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच टकराव से जुड़ी हुई है। इन प्लेटों की गतिविधियों ने हिमालय और उसके आस-पास के पहाड़ी क्षेत्रों को आकार दिया है और भूकंपीय गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया है।


अफगानिस्तान में भूकंप का खतरा

अफगानिस्तान में भूकंप का खतरा इसलिए अधिक है क्योंकि यह दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। यहाँ भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में मिलती हैं, जिससे पृथ्वी की ऊपरी परत में दरारें पड़ जाती हैं। हिंदू कुश पहाड़ों में, इस प्रक्रिया के कारण लिथोस्फीयर के कुछ हिस्से मेंटल में धंस जाते हैं। उत्तरी अफगानिस्तान के पामीर-हिंदू कुश क्षेत्र में अक्सर तेज़ भूकंप आते हैं, जिनमें से कुछ 200 किलोमीटर की गहराई पर होते हैं, जो कि विश्व स्तर पर दुर्लभ हैं।