अफगानिस्तान में चीनी रेस्टोरेंट में धमाका, सात की मौत
काबुल में एक चीनी रेस्टोरेंट में हुए भयंकर धमाके में सात लोगों की जान चली गई, जिसमें एक चीनी नागरिक भी शामिल है। इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जो उइगर मुसलमानों के खिलाफ चीन के कथित अत्याचारों का प्रतिशोध बताया जा रहा है। इस घटना ने चीन की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Jan 21, 2026, 11:50 IST
काबुल में चीनी रेस्टोरेंट पर हमला
पाकिस्तान के बाद अब अफगानिस्तान में भी चीन को निशाना बनाया गया है। काबुल के नवा क्षेत्र में एक चीनी रेस्टोरेंट में भयंकर विस्फोट हुआ, जिसमें सात लोगों की जान चली गई। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामिक स्टेट के एक आत्मघाती हमलावर ने इस हमले को अंजाम दिया। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मृतकों में एक चीनी नागरिक और छह अफगान शामिल हैं। धमाके की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पूरा क्षेत्र धुएं से भर गया, जिससे अफरातफरी का माहौल बन गया। लोग भागते हुए नजर आए और किसी को समझ नहीं आया कि क्या हुआ।
चीन की सुरक्षा पर सवाल
इस हमले ने चीन की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी है, क्योंकि इसमें एक चीनी नागरिक की भी जान गई है। जिस रेस्टोरेंट में धमाका हुआ, उसे एक चीनी मुस्लिम, अब्दुल माजिद, अपनी पत्नी और एक अफगानी साथी के साथ मिलकर चलाते थे। धमाका रेस्टोरेंट की रसोई के पास हुआ, जिससे इमारत के सामने बड़ा छेद हो गया।
घायलों की स्थिति
मानवीय संगठन इमरजेंसी के अनुसार, अस्पताल में 20 लोग भर्ती हुए, जिनमें से सात की मौत हो चुकी है। घायलों में चार महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल हैं। इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि यह चीन सरकार द्वारा उइगर मुसलमानों के खिलाफ किए गए अपराधों का प्रतिशोध है। तालीबानी प्रशासन ने सुरक्षा के दावे किए हैं, लेकिन अब इन पर सवाल उठने लगे हैं। अफगानी पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने इस हमले पर नाराजगी व्यक्त की है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुआज़ियाकुन ने अफगानिस्तान से घायलों के इलाज में कोई कमी न छोड़ने की अपील की है और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामिक स्टेट की घरेलू शाखा ने चीनी नागरिकों को अपनी हिट लिस्ट में शामिल कर लिया है।
उइगर मुसलमानों पर अत्याचार
इस हमले का कारण चीन के झिंजियांग क्षेत्र में उइगर मुसलमानों के खिलाफ कथित दुर्व्यवहार को बताया जा रहा है। मानवाधिकार समूहों ने चीन पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने इस समुदाय के खिलाफ अत्याचार किए हैं।