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अमीर-गरीब देशों के बीच बढ़ती खाई पर चिंता: नई रिपोर्ट में खुलासा

हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में अमीर और गरीब देशों के बीच बढ़ती आर्थिक खाई पर चिंता जताई गई है। अमेरिका द्वारा विकासशील देशों को दिए जाने वाले फंड में कटौती के साथ-साथ भू-राजनीतिक तनावों के कारण विकासशील देशों की स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल सेविले में अपनाए गए प्लान के बावजूद, वैश्विक सहयोग में चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। जानें इस रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
 

अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चिंता

अमीर और गरीब देशों के बीच की आर्थिक खाई लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चिंतित हैं। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ है कि यह खाई और भी गहरी होती जा रही है। इस समस्या को हल करने के लिए वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार और कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर सहमति बनी थी, लेकिन वे लागू नहीं हो सके। इसके परिणामस्वरूप, विकसित और समृद्ध राष्ट्र और अधिक मजबूत हो रहे हैं, जबकि गरीब देश विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि अमेरिका ने विकासशील देशों को दिए जाने वाले फंड में 59 प्रतिशत की कटौती की है।


संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी एक रिपोर्ट में इस बढ़ते संकट की जानकारी दी गई है। यह रिपोर्ट पिछले साल जून में स्पेन के सेविले में अपनाए गए प्लान का आकलन करती है। यह रिपोर्ट अगले हफ्ते वाशिंगटन में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) और विश्व बैंक की महत्वपूर्ण बैठकों से पहले जारी की गई है।


प्लान का उद्देश्य

पिछले साल जून में अमीर और गरीब देशों के बीच की खाई को कम करने के लिए एक योजना बनाई गई थी। इसका उद्देश्य अमीर-गरीब देशों के बीच की आर्थिक असमानता को समाप्त करना और 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करना है।


ईरान युद्ध का प्रभाव

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि वैश्विक विकास को गति देने की पूरी तैयारी थी, लेकिन ईरान युद्ध के कारण विश्व अर्थव्यवस्था के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल छा गए हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र में आर्थिक और सामाजिक मामलों के अवर महासचिव ली जुनहुआ ने चेतावनी दी है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव विकासशील देशों की चुनौतियों को और बढ़ा रहे हैं। इन तनावों के कारण विकासशील देशों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग की चुनौतियाँ

उन्होंने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए यह समय बेहद जोखिमभरा बनता जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक हित अब तेजी से आर्थिक संबंधों और वित्तीय नीतियों की दिशा तय करने लगे हैं।' रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बढ़ती व्यापारिक बाधाएं और जलवायु संबंधी आपदाएं भी इस खाई को और चौड़ा कर रही हैं।


अमेरिका की भूमिका

पिछले साल सेविले में आयोजित सम्मेलन में अमेरिका को छोड़कर अन्य देशों के नेताओं ने सर्वसम्मति से 'सेविले प्रतिबद्धता' को अपनाया था, जिसका उद्देश्य विकास के लिए हर साल चार हजार अरब डॉलर की वित्तीय कमी को पाटना था। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती वित्तीय खाई को पाटने के लिए यह सबसे बड़ी उम्मीद है।


ली जुनहुआ ने कहा कि 2025 में 25 देशों ने गरीब राष्ट्रों के लिए अपनी विकास सहायता में कटौती की, जिसके परिणामस्वरूप 2024 की तुलना में कुल मिलाकर 23 प्रतिशत की गिरावट आई। उन्होंने बताया कि अमेरिका की ओर से सबसे बड़ी 59 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। ली ने यह भी कहा कि प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर 2026 में इसमें और 5.8 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है, जो वैश्विक सहयोग के सामने नई चुनौतियों की ओर इशारा करती है।