अमेरिका-इजरायल का ईरान युद्ध: सैन्य नुकसान और वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रभाव
ईरान के खिलाफ युद्ध का नया मोड़
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किया गया युद्ध अब उनके लिए एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस की हालिया रिपोर्ट ने इस तथ्य को उजागर किया है जिसे वॉशिंगटन छिपाने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ चलाए गए 40 दिन के सैन्य अभियान में अमेरिका के कम से कम 42 सैन्य विमान या तो नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
सैन्य नुकसान का विस्तृत विवरण
यह आंकड़ा केवल सैन्य हानि का नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की उस शक्ति पर भी सवाल उठाता है जो उसे दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य शक्ति मानती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस संघर्ष में चार एफ-15 ई स्ट्राइक ईगल, एक एफ-35 ए, एक ए-10 हमला विमान, सात केसी-135 ईंधन आपूर्ति विमान, एक ई-3 चेतावनी और नियंत्रण विमान, दो एमसी-130 जे विशेष अभियान विमान, एक एचएच-60 डब्ल्यू बचाव हेलीकाप्टर, चौबीस एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4 सी ट्राइटन ड्रोन को नुकसान पहुंचा।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत
यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को इजरायल के सहयोग से 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत शुरू किया गया था। अमेरिका ने सोचा था कि ईरान को जल्दी ही पराजित कर दिया जाएगा, लेकिन स्थिति इसके विपरीत हो गई। पूरे पश्चिम एशिया में मिसाइल, समुद्री और हवाई संघर्ष भड़क उठे। अप्रैल में संघर्ष विराम के बाद हमले कुछ समय के लिए धीमे हुए, लेकिन तनाव अब भी बना हुआ है।
अर्थव्यवस्था पर युद्ध का प्रभाव
युद्ध का आर्थिक बोझ अमेरिका के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के नियंत्रक जूल्स हर्स्ट तृतीय ने स्वीकार किया है कि ईरान अभियान की लागत अब 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह राशि लगातार बढ़ रही है क्योंकि नष्ट हुए विमानों और सैन्य उपकरणों की मरम्मत पर भारी खर्च आ रहा है।
अमेरिकी सैन्य स्थिति की कमजोरी
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अमेरिकी नौसेना ने चेतावनी दी है कि अगर कांग्रेस से आपातकालीन धन नहीं मिला, तो बजट संकट उत्पन्न हो सकता है। युद्ध में कम से कम पंद्रह अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और पांच सौ से अधिक घायल हुए हैं। अमेरिकी युद्धपोत जेराल्ड आर फोर्ड में आग लगने की घटना ने अमेरिकी सैन्य प्रणाली की कमजोरी को और उजागर किया है।
ईरान की रणनीतिक स्थिति में सुधार
ईरान ने इस संघर्ष में केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी अमेरिका को गहरी चोट पहुंचाई है। हार्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की पकड़ अब पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल गुजरता है।
अमेरिका की वैश्विक छवि पर असर
युद्ध के परिणामस्वरूप अमेरिका की छवि भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। जिस देश ने खुद को विश्व का प्रहरी बताया, वह अब अधूरे युद्ध और बिखरी रणनीति का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के साथ मौजूदा टकराव अमेरिका के लिए एक गंभीर हार साबित हो सकता है।
शांति वार्ता की स्थिति
हालांकि संघर्ष विराम हो चुका है, अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठप पड़ी है। ईरान की मांग है कि सभी सैन्य कार्रवाइयां बंद हों, अमेरिकी सेना ईरान के आसपास के क्षेत्रों से हटे, और आर्थिक प्रतिबंध समाप्त किए जाएं। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इन मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
अंतिम विचार
ईरान युद्ध ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक हथियार और विशाल सैन्य बजट किसी देश को अजेय नहीं बना सकते। अमेरिका ने जिस गर्व के साथ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू किया था, वही अब उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा पर एक बड़ा धक्का बन गया है।