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अमेरिका-ईरान के बीच शांति की उम्मीदें धूमिल, बढ़ रहा है तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच जून में स्थापित शांति समझौते की समय-सीमा समाप्त हो गई है, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई है, और ईरान ने हाल ही में अमेरिकी जहाजों पर हमले किए हैं। पाकिस्तान अब भी मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका ने ईरान की मांगों को खारिज कर दिया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की स्थिति


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जून में स्थापित शांति की संभावनाएं अब कमजोर होती दिख रही हैं। दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते के लिए निर्धारित 60 दिनों की समय-सीमा सोमवार को समाप्त हो गई, लेकिन इस दौरान कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। इसके विपरीत, दोनों पक्ष एक-दूसरे से और अधिक दूर होते गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी है, जिससे पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव की आशंका बढ़ गई है।


एपी की रिपोर्ट के अनुसार, जून में हुए समझौते में दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियों को रोकने और युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ाने पर सहमति जताई थी। इसके साथ ही, ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद का समाधान खोजने के लिए 60 दिन का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि, समझौते के कुछ ही दिनों बाद बातचीत ठप हो गई और दोनों पक्ष फिर से हमलों में उलझ गए।


हमलों के कारण बिगड़ते हालात

समझौते के एक सप्ताह बाद, ईरान ने ओमान के तट के पास जहाजों पर गोलीबारी की। यह समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित है, जहां अमेरिकी सेना की निगरानी है। इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, जिसके बाद ईरान ने अरब देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों से निशाना बनाया।


दोनों देशों ने एक-दूसरे पर जून के समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका के साथ सीधी बातचीत जून में ही रोक दी गई थी, जबकि डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत जारी रहने का दावा किया और ईरान के खिलाफ बड़े हमले की चेतावनी दी।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

जून के समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला पाकिस्तान अब भी दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि 60 दिन की समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद वह इस प्रयास को खत्म नहीं मानता। इस बीच, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने से जुड़ी अपनी मांगें रखी हैं और ओमान के साथ समझौता भी किया है। अमेरिका ने इन मांगों को अस्वीकार कर दिया है, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय बढ़ता दिखाई दे रहा है।