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अमेरिका-ईरान तनाव: क्या होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से बन रहा है संकट का केंद्र?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जब अमेरिका ने ईरान में सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई का जवाब देते हुए ईरान ने भी प्रतिक्रिया दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, इस विवाद का केंद्र बन गया है। अमेरिका का कहना है कि वह इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जबकि ईरान ने खाड़ी देशों को चेतावनी दी है। इस बीच, इज़राइल और लेबनान के बीच एक समझौता भी हुआ है, जो क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जगाता है।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद शांति की उम्मीदें लंबे समय तक नहीं टिक पाईं। दोनों देशों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान में सैन्य कार्रवाई की है, जिसके जवाब में ईरान ने भी प्रतिक्रिया देने का दावा किया है। इस सैन्य अभियान में अमेरिकी विमानों ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण स्थलों के साथ-साथ तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका ने इसे समुद्री व्यापार की सुरक्षा और युद्धविराम समझौते के पालन के लिए आवश्यक बताया।


सैन्य कार्रवाई की पुष्टि

अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान की पुष्टि की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज पर हुए कथित ड्रोन हमले के जवाब में की गई। अमेरिका का दावा है कि सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज एम/वी एवर लवली पर 25 जून को हमला किया गया था, जब वह ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहा था।


ट्रंप का संकेत

हमले से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में संकेत दिया था कि अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका सैन्य कदम उठाएगा, तो उन्होंने कहा, "आपको जल्द पता चल जाएगा।" इसके कुछ समय बाद CENTCOM ने ऑपरेशन की आधिकारिक घोषणा कर दी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करते हुए वाणिज्यिक जहाजों पर हमला किया है और इसे "गंभीर गलती" बताया।


ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिकी कार्रवाई के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। हालांकि, किन ठिकानों पर हमला हुआ और कितना नुकसान हुआ, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ईरानी मीडिया ने यह भी बताया कि अमेरिकी ऑपरेशन के बाद दक्षिणी शहर सिरिक के पास एक मिसाइल गिरी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कथित नियम तोड़ने वाले जहाजों को चेतावनी देने के लिए गोलियां चलाई गईं।


तनाव का केंद्र: होर्मुज जलडमरूमध्य

वर्तमान विवाद का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका का कहना है कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपने सहयोगियों के साथ लगातार काम करेगा।


ईरान की चेतावनी

ईरान ने खाड़ी देशों को अमेरिका के साथ मिलकर कोई सैन्य या रणनीतिक कदम न उठाने की चेतावनी दी है। तेहरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ईरान ने अमेरिका और छह खाड़ी देशों के संयुक्त बयान का भी विरोध किया, जिसमें जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने के ईरानी दावे को खारिज किया गया था। ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि यदि ईरान की भूमिका को नजरअंदाज किया गया तो इस समुद्री मार्ग से सुरक्षित आवाजाही की गारंटी देना मुश्किल होगा।


जेडी वेंस की चेतावनी

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम का सम्मान किया है, लेकिन यदि ईरान हिंसक कार्रवाई जारी रखता है तो उसका जवाब भी उसी तरह दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी विवाद का समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि हमलों के जरिए।


इजराइल-लेबनान समझौता

जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में एक सकारात्मक घटनाक्रम भी सामने आया है। अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान के बीच एक ढांचागत समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य इज़राइल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को कम करना है। समझौते में हिज़्बुल्लाह के भविष्य में निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की चरणबद्ध वापसी का प्रस्ताव शामिल है। हालांकि, हिज़्बुल्लाह ने इस समझौते को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।