अमेरिका-ईरान तनाव: क्या होर्मुज जलडमरूमध्य बनेगा युद्ध का कारण?
अमेरिका का बड़ा हमला
नई दिल्ली: रविवार को अमेरिका ने ईरान पर एक महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाई की। यह कदम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के जवाब में उठाया गया, जिसमें जहाज में आग लग गई थी और चालक दल को लाइफबोट का सहारा लेना पड़ा। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ गया है।
US सेंट्रल कमांड की कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इस हमले में लगभग 140 ठिकानों को निशाना बनाया गया, जो पिछले हमलों की तुलना में कहीं अधिक है। इन लक्ष्यों में मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स, गोला-बारूद के भंडार, संचार केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे।
कमांड ने स्पष्ट किया कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है, जिसके माध्यम से वह नागरिक जहाजों को धमकाता है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा, "ईरान ने गलत निर्णय लिया है। अब उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे।"
ईरान का जवाबी हमला
अमेरिकी हमलों के जवाब में, ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर हमले किए, जिनमें बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान शामिल थे। तेहरान ने इसे अमेरिकी हस्तक्षेप का प्रतिरोध बताया। खोर्रमाबाद में IRGC एयरोस्पेस फोर्स के नए एयर डिफेंस सिस्टम ने एक अमेरिकी क्रूज मिसाइल को नष्ट कर दिया।
यह ईरान की बढ़ती रक्षा क्षमताओं का संकेत माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, जास्क बंदरगाह पर हुए हमले में ईरान की नौसेना के लेफ्टिनेंट हामिदरेजा देहघानी की मृत्यु हो गई, जिसकी पुष्टि स्थानीय स्रोतों ने की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
तेल और गैस के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य अब बातचीत में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। पिछले हफ्ते हुई झड़पों के बाद शांति वार्ता टूटने के कगार पर पहुंच गई है। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही ईरान ने होर्मुज को खोलने का ऐलान किया था।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "दुनिया के लिए सबसे खास दिन" बताया था और उम्मीद जताई थी कि इससे शांति की राह खुलेगी। लेकिन अब स्थिति फिर से बिगड़ गई है। 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुका है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हमले और जवाबी हमले से खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज का मुद्दा हल नहीं होता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी। अमेरिका ईरान की हमले की क्षमता को तोड़ना चाहता है, जबकि ईरान क्षेत्र में अमेरिकी उपस्थिति को चुनौती दे रहा है। नतीजतन, खाड़ी में तनाव, तेल की कीमतों में वृद्धि और एक नए संघर्ष की आशंका बनी हुई है।