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अमेरिका-ईरान तनाव: होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ती चुनौतियाँ

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर। ईरान ने नाकाबंदी को सख्त कर दिया है, जबकि अमेरिका ने ईरान को ब्लैकमेल करने से मना किया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब को बंद करने की चेतावनी दी है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। संयुक्त अरब अमीरात ने इसे आर्थिक आतंकवाद बताया है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की गतिविधियों के चलते ट्रंप प्रशासन की स्थिति कमजोर नजर आ रही है। ईरान द्वारा होर्मुज को बंद करने की धमकी पर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका को ब्लैकमेल नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत जारी है, और इससे पहले उन्होंने ईरान के चालाकी भरे कदमों का जिक्र किया था।


ईरान की नाकाबंदी की घोषणा

इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने घोषणा की है कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी को और सख्त कर दिया है। यह जलमार्ग तब तक बंद रहेगा जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर अपनी नाकाबंदी नहीं हटाता।


ईरान की शर्तें

ईरान ने पहले कहा था कि ईरानी अधिकारियों के समन्वय और शुल्क के भुगतान के बाद जहाजों को गुजरने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन आईआरजीसी ने अपने बयान को पलटते हुए कहा है कि नाकाबंदी का उल्लंघन करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।


बाब अल-मंडेब संकट की संभावना

हालांकि होर्मुज संकट अभी खत्म नहीं हुआ है, यमन के हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब को बंद करने की चेतावनी दी है। यह मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और विश्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।


हूती विद्रोहियों की चेतावनी

हूती के उप विदेश मंत्री हुसैन अल-एजी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि अगर सना बाब अल-मंडेब को बंद करने का निर्णय लेता है, तो पूरी मानवता इसके प्रभावों से प्रभावित होगी। उन्होंने ट्रंप और अन्य देशों से शांति में बाधा डालने वाली नीतियों को समाप्त करने की अपील की।


यूएई की प्रतिक्रिया

संयुक्त अरब अमीरात ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे आर्थिक आतंकवाद करार दिया है। एक मंत्री ने कहा कि केवल युद्धविराम पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईरान के खतरों का समाधान भी आवश्यक है, जिसमें उसकी परमाणु क्षमता और बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं।