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अमेरिका-ईरान युद्ध का आर्थिक प्रभाव: 107 दिनों में भारी खर्च

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष ने अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। इस लेख में हम जानेंगे कि इस युद्ध की लागत कितनी थी, अमेरिका ने कितने सैन्य विमानों का उपयोग किया, और गोला-बारूद पर कितना खर्च हुआ। सीजफायर की स्थिति में पहुंचने के बावजूद, अमेरिका के लिए यह संघर्ष एक महंगा अनुभव साबित हुआ है।
 

अमेरिका-ईरान संघर्ष का आर्थिक मूल्यांकन

अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष ने भले ही अब सीजफायर की स्थिति को प्राप्त कर लिया हो, लेकिन अमेरिका को इस युद्ध का गहरा आर्थिक नुकसान हुआ है। इस संघर्ष की लागत इतनी अधिक रही कि अमेरिका को हर सेकंड लगभग ₹1 लाख, हर घंटे करीब ₹394 करोड़ और प्रतिदिन लगभग ₹9400 करोड़ खर्च करने पड़े। अब जब दोनों देशों के बीच सीजफायर समझौते पर डिजिटल हस्ताक्षर होने की खबरें आ रही हैं, चर्चा इस बात की है कि इस युद्ध ने अमेरिका को कितना नुकसान पहुंचाया है। प्रारंभिक छह दिनों में ही अमेरिका ने लगभग 11.3 बिलियन डॉलर खर्च कर दिए थे, जिसका अर्थ है कि पहले चरण में अमेरिका रोजाना लगभग $2 बिलियन खर्च कर रहा था। इसके बाद भी युद्ध का खर्च कम नहीं हुआ और औसतन $1 बिलियन प्रतिदिन का खर्च जारी रहा।


अमेरिका की सैन्य तैनाती और खर्च

युद्ध के दौरान अमेरिका ने अपने अत्याधुनिक और महंगे लड़ाकू विमानों को युद्धक्षेत्र में उतारा। B2 स्पिरिट बमबर, जिसे दुनिया के सबसे उन्नत बमबरों में से एक माना जाता है, की एक घंटे की उड़ान का खर्च लगभग 1.4 करोड़ रुपये है। F22 रैप्टर की प्रति घंटे उड़ान लागत लगभग ₹80 लाख, F35A की ₹40 लाख, F15EE की ₹31 लाख और B1B बमबर की लगभग ₹59 लाख प्रति घंटे बताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अभियान में 13 प्रकार के 300 से अधिक सैन्य विमानों को तैनात किया। इसके अलावा, अमेरिका ने समुद्र में भी अपनी विशाल सैन्य उपस्थिति बनाए रखी, जिसमें दो एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स शामिल थे, जिनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन और यूएसएस जेरार्ड आर फोर्ट शामिल थे। इनकी दैनिक परिचालन लागत ₹61 से ₹82 करोड़ तक बताई गई है। इसके अतिरिक्त, 14 डिस्ट्रायर, दो सबमरीन और तीन कॉम्बैट शिप भी तैनात किए गए।


गोला-बारूद और अन्य सैन्य खर्च

डिस्ट्रायर पर प्रतिदिन लगभग ₹1 करोड़, सबमरीन पर करीब ₹1.5 करोड़ और कॉम्बैट शिप पर 1.8 से ₹4 करोड़ प्रतिदिन खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर, एयरक्राफ्ट और नेवी तैनाती पर रोजाना लगभग ₹661 करोड़ खर्च हुए, जिससे 107 दिनों में कुल खर्च लगभग ₹71,000 करोड़ तक पहुंच गया। गोला-बारूद का खर्च भी किसी बड़े युद्ध से कम नहीं था। अमेरिका ने टॉमहॉक ब्लॉक वी क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग किया, जिनकी कीमत लगभग ₹34 करोड़ प्रति मिसाइल है। रिपोर्टों के अनुसार, 174 टॉमहॉक मिसाइलें दागी गईं, जिन पर लगभग ₹5900 करोड़ खर्च हुए। एजीएम 888 मिसाइलों की कीमत लगभग 8.2 करोड़ प्रति यूनिट रही, और 45 मिसाइलों पर करीब ₹369 करोड़ खर्च हुए।