अमेरिका-ईरान वार्ता: इस्लामाबाद में 21 घंटे की चर्चा, लेकिन कोई समझौता नहीं
वार्ता का सारांश
नई दिल्ली: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता 21 घंटे तक चली, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। क्षेत्रीय तनाव और सैन्य टकराव के बीच यह बातचीत बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका ईरान का विश्वास जीतने में असफल रहा है।
ईरान की मांगें
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने वार्ता में 10 सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया, जिसमें दो प्रमुख मांगें थीं। पहली, लेबनान में तुरंत युद्धविराम लागू किया जाए, और दूसरी, कतर सहित विदेशी बैंकों में जमा ईरान की लगभग 6 अरब डॉलर की संपत्ति को अनफ्रीज किया जाए।
ईरान का कहना था कि दो हफ्ते के अस्थायी संघर्षविराम की जो सहमति बनी थी, उसमें लेबनान का मुद्दा भी शामिल था, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने इन मांगों पर सख्त रुख अपनाया, जिससे वार्ता में गतिरोध उत्पन्न हुआ।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान का रुख
अमेरिका ने ईरान से स्पष्ट आश्वासन मांगा कि वह परमाणु हथियार बनाने की क्षमता विकसित नहीं करेगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उन्होंने अपना 'अंतिम और सबसे बेहतर प्रस्ताव' रखा था, लेकिन ईरान की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े ट्रांजिट और सुरक्षा मुद्दों पर भी सहमति नहीं बन सकी।
गालिबफ का दृष्टिकोण
मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि पिछले दो युद्धों के अनुभव ने ईरान को सतर्क बना दिया है, इसलिए वह किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान कूटनीति को अपने अधिकारों की रक्षा का माध्यम मानता है और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।
ईरान की स्थिति
गालिबफ ने अपने देशवासियों का धन्यवाद करते हुए कहा कि 9 करोड़ लोगों वाला ईरान एक मजबूत राष्ट्र है। वार्ता बिना समझौते के समाप्त होने के बावजूद, दोनों पक्षों ने पूरी तरह से संबंध तोड़ने की बात नहीं की है। अब यह देखना होगा कि आगे दोनों देश किस दिशा में बढ़ते हैं। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह अपने हितों और अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।