अमेरिका-ईरान वार्ता में असफलता: क्या शांति की उम्मीदें खत्म हो गईं?
अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का नतीजा
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता असफल रही है। मध्य पूर्व में लगभग 40 दिनों तक चले संघर्ष के बाद, दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम के बावजूद, दोनों पक्ष स्थायी समझौते पर नहीं पहुँच सके। इस्लामाबाद में हुई वार्ताओं का उद्देश्य अस्थायी संघर्षविराम को दीर्घकालिक शांति में बदलना था, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य सहित कई मुद्दों पर गतिरोध के कारण कोई समझौता नहीं हो सका। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 21 घंटे की वार्ता के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की वापसी की घोषणा की।
वार्ता में कोई समझौता नहीं हुआ
जेडी वैंस ने प्रेस को बताया कि अमेरिका ने ईरान को बेहतरीन डील का प्रस्ताव दिया था, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा, "हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं, और यह भी बताया है कि हम किन मुद्दों पर समझौता करने को तैयार हैं।"
उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए कोई समझौता नहीं हो सका।
परमाणु हथियारों पर अमेरिका की मांग
वैंस ने ईरान द्वारा अस्वीकार किए गए मुद्दों का पूरा विवरण नहीं दिया, लेकिन यह संकेत दिया कि अमेरिका को ईरान से परमाणु हथियार न विकसित करने की सकारात्मक प्रतिबद्धता नहीं मिली।
उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। यही अमेरिका के राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य है।"
ईरानी मीडिया की प्रतिक्रिया
ईरान के मीडिया ने रिपोर्ट किया कि वार्ता विफल होने का कारण अमेरिका की ऐसी मांगें थीं जिन्हें तेहरान स्वीकार नहीं कर सकता था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने युद्ध के दौरान जो हासिल नहीं किया, वही अब वार्ता के माध्यम से प्राप्त करना चाहा।