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अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता ने अमेरिकी राजनीति में विवाद को जन्म दिया है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस द्वारा पाकिस्तान की भूमिका की सराहना के बाद, रिपब्लिकन सीनेटरों ने इस पर गंभीर चिंता जताई है। सीनेटर रिक स्कॉट और टिम शीही ने पाकिस्तान और कतर पर आतंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों जैसे इजराइल और यूएई पर भरोसा करना चाहिए। इस विवाद ने व्हाइट हाउस की कूटनीति को चुनौती दी है।
 

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का विवाद

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता ने कूटनीतिक मोर्चे पर प्रगति की है, लेकिन अमेरिकी राजनीति में इस पर विवाद बढ़ गया है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की, जिसके बाद दो प्रमुख रिपब्लिकन सीनेटरों ने इस पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पाकिस्तान और कतर पर चरमपंथियों को समर्थन देने का आरोप लगाया।


सीनेटर रिक स्कॉट की चेतावनी

फ्लोरिडा के सीनेटर रिक स्कॉट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास है। उन्होंने कहा कि ये देश ईरान के आतंकी अभियानों को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।


स्कॉट ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की सख्त नीति को दोहराते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


सीनेटर टिम शीही का आक्रामक रुख

मोंटाना के सीनेटर टिम शीही ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन को एक दशक तक छिपाकर रखा। उन्होंने पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर करते हुए कहा कि यह देश आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में विश्वसनीय नहीं है।


शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए कहा कि यह देश अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों के लिए वित्तीय हेरफेर का केंद्र बना हुआ है।


मध्य पूर्व में पारंपरिक सहयोगियों पर जोर

सीनेटर शीही ने सुझाव दिया कि अमेरिका को पाकिस्तान और कतर के बजाय इजराइल, यूएई और सऊदी अरब पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ये देश अमेरिका के असली और दीर्घकालिक सहयोगी हैं।


अमेरिकी सीनेटरों की यह स्थिति दर्शाती है कि व्हाइट हाउस भले ही पाकिस्तान और कतर को वार्ता में शामिल कर रहा हो, लेकिन संसद में इन देशों की विश्वसनीयता पर संदेह बढ़ रहा है।