अमेरिका-ईरान समझौता: इजरायल की लेबनान में स्थिति पर संकट
अमेरिका और ईरान के बीच समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ है, जिसका उद्देश्य अगले 60 दिनों में स्थायी युद्धविराम स्थापित करना है। स्विट्जरलैंड में अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का नया दौर शुरू हो चुका है, लेकिन इस समझौते की सफलता इजरायल की स्थिति पर निर्भर करती है।
इजरायल की स्थिति
समझौते के बावजूद, इजरायली सेना लेबनान में बमबारी जारी रखे हुए है। हाल ही में, शुक्रवार को 150 स्थानों पर हमले किए गए, जिसमें 47 लोगों की मौत हुई। शनिवार को भी इजरायली हमलों में 32 लोग मारे गए। इन हमलों के बाद, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद कर दिया।
लेबनान में इजरायल की भूमिका
लेबनान की सरकार और हिजबुल्लाह इजरायली सैनिकों की वापसी की मांग कर रहे हैं। लेबनान सरकार चाहती है कि इजरायल के साथ सीधी वार्ता हो, जबकि हिजबुल्लाह इसे ईरान के साथ होने वाली डील का हिस्सा बनाना चाहता है। यदि इजरायल अपने हमले जारी रखता है, तो ईरान के पास डील को तोड़ने का विकल्प होगा।
अमेरिका की अपेक्षाएँ
डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि इजरायल को लेबनान में अपने हमलों को कम करना चाहिए ताकि स्थायी युद्धविराम की संभावना बढ़ सके। उन्होंने कहा कि इजरायल को हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने व्यवहार में सुधार करना चाहिए।
इजरायल की जिद
अमेरिका के दबाव के बावजूद, इजरायल अपनी सेना को लेबनान से वापस बुलाने के लिए तैयार नहीं है। इजरायली मंत्री स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि अमेरिका नाराज होता है, तो भी सेना वापस नहीं जाएगी।
इजरायल का रणनीतिक दृष्टिकोण
इजरायल ने एक नक्शा जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि उसने किस क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है। इजरायल इस क्षेत्र को बफर जोन के रूप में उपयोग करना चाहता है ताकि वह हमलों से सुरक्षित रह सके।
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष
हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष 8 अक्टूबर 2023 से जारी है। 2024 में इजरायल ने एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया था, लेकिन अमेरिका के हस्तक्षेप के बाद युद्धविराम हो गया। हाल के संघर्ष में, इजरायली हमलों में 4057 लोग मारे गए और 12,121 से अधिक लोग घायल हुए हैं।