अमेरिका-ईरान समझौता: क्या है 14 बिंदुओं का ऐतिहासिक मसौदा?
नई दिल्ली में समझौते का ऐलान
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित समझौते का पूरा मसौदा अब सार्वजनिक किया गया है। इस दस्तावेज में 14 महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख है, जिनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना, क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना और आर्थिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। इसे एक ऐतिहासिक समझौता माना जा रहा है, जिसमें सुरक्षा, व्यापार, परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक सहायता जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं।
सैन्य कार्रवाई पर रोक
समझौते के अनुसार, अमेरिका और ईरान ने सभी प्रकार की सैन्य गतिविधियों, हमलों और गोलीबारी को तुरंत रोकने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि वे एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी प्रकार की धमकी या आक्रामक कदम नहीं उठाएंगे।
संप्रभुता का सम्मान और वार्ता
दोनों पक्ष एक-दूसरे की संप्रभुता, सीमाओं और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे। इसके साथ ही, 60 दिनों के भीतर एक व्यापक और अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए बातचीत जारी रहेगी। इस अवधि में कोई नया सैन्य या प्रतिबंधात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट और नौसैनिक नाकाबंदी
समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज स्ट्रेट से संबंधित है। ईरान ने इस समुद्री मार्ग से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। इसके बदले, अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी को हटाने और अपनी सैन्य उपस्थिति को कम करने पर सहमत हुआ है।
आर्थिक राहत और निवेश योजना
अमेरिका ने ईरान को आर्थिक राहत देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने का वादा किया है। समझौते के तहत कुछ प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी, तेल निर्यात और बैंकिंग सेवाओं में राहत मिलेगी, और ईरान की फंसी हुई संपत्तियों को जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके अलावा, ईरान के विकास के लिए 300 अरब डॉलर की संभावित आर्थिक योजना पर भी सहमति बनी है।
परमाणु कार्यक्रम पर सहमति
ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह परमाणु हथियारों का विकास नहीं करेगा। दोनों देशों के बीच आगे होने वाली तकनीकी वार्ताओं में परमाणु कार्यक्रम से संबंधित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
निगरानी और अंतरराष्ट्रीय मान्यता
समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष तंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही, अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी दिलाने की योजना है, ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता और समर्थन मिल सके। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होगा और वैश्विक व्यापार व ऊर्जा बाजार को स्थिरता मिलेगी।